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अब्बास अंसारी की सजा पर गरमाई सियासत: बीजेपी बोली बबूल बोकर आम की उम्मीद क्यों?

News Desk
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01 Jun 2025
06:39 AM
1 min read
अब्बास अंसारी की सजा पर गरमाई सियासत: बीजेपी बोली बबूल बोकर आम की उम्मीद क्यों?


>मऊ सदर से विधायक और माफिया मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी की हेट स्पीच मामले में सजा और विधायकी समाप्त होने के बाद यूपी की राजनीति गरमा गई है। एक ओर सरकार ने तेजी से कार्रवाई करते हुए मऊ विधानसभा सीट को रिक्त घोषित किया, वहीं दूसरी ओर भाजपा ने इस पूरे मामले पर सख्त प्रतिक्रिया दी है।

भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी का तीखा हमला


>अब्बास अंसारी की सजा पर भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा “जो बोए पेड़ बबूल का, तो आम कहां से होय। अब्बास को अपने कर्मों का फल सजा के रूप में मिला है। ऐसे आपराधिक चरित्र वाले लोगों को लोकतंत्र के मंदिर में जगह नहीं मिलनी चाहिए।”


>राकेश त्रिपाठी ने आगे कहा कि अब्बास की सदस्यता जनप्रतिनिधित्व कानून के अंतर्गत गई है, और अदालत ने पूरी न्यायिक प्रक्रिया के बाद उन्हें दोषी ठहराया है। भाजपा ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया है और कहा कि अपराधियों को कानून से ऊपर नहीं समझा जा सकता।

अब्बास की विधायकी 24 घंटे में खत्म, सीट रिक्त घोषित


>शनिवार को मऊ की MP/MLA कोर्ट ने अब्बास को हेट स्पीच मामले में 2 साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद रविवार को ही यूपी विधानसभा सचिवालय ने उनकी विधायकी समाप्त कर दी और मऊ विधानसभा सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया। विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप दुबे ने आदेश जारी किया और मुख्य निर्वाचन अधिकारी को उपचुनाव के लिए प्रस्ताव भेजा।

सरकार की त्वरित कार्रवाई पर सवाल और रणनीति


>राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अगर अब्बास सोमवार को हाईकोर्ट में अपील कर देते और सजा पर स्टे मिल जाता, तो उनकी सदस्यता नहीं जाती। इसी आशंका के चलते सरकार ने रविवार को ही सचिवालय खुलवाकर कार्रवाई पूरी कर दी। माना जा रहा है कि सरकार बिहार चुनाव से पहले मऊ में उपचुनाव कराना चाहती है।

क्या था अब्बास का हेट स्पीच विवाद?


>2022 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान अब्बास ने एक सभा में कहा था “मैं अखिलेश यादव से कहकर आया हूं कि सरकार बनने पर 6 महीने तक किसी की ट्रांसफर-पोस्टिंग नहीं होगी। पहले हिसाब-किताब लिया जाएगा, फिर ट्रांसफर होंगे।”


>अदालत ने इस बयान को लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला बताया और कहा कि इससे अफसरों और मतदाताओं के बीच भय का माहौल बनता है।

न्यायालय की सख्त टिप्पणी


>मामले की सुनवाई कर रहे जज डॉ. केपी सिंह ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में भड़काऊ भाषणों के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे जनप्रतिनिधि अपना समय सेवा के बजाय बदला लेने में बर्बाद करते हैं, जो समाज और संविधान दोनों के खिलाफ है।

अब्बास की प्रतिक्रिया – “कानूनी प्रक्रिया है, कोर्ट में रखेंगे पक्ष”


>अब्बास अंसारी ने कहा कि उन्हें कानून पर भरोसा है और वह अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे। “यह कानूनी प्रक्रिया है, हर कोई अदालत जाता है, हम भी जाएंगे।”

 

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