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मदरसों की जांच पर हाईकोर्ट सख्त - एनएचआरसी को फटकार, ईओडब्ल्यू जांच पर अंतरिम रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एनएचआरसी के मदरसों की जांच के आदेश को प्रथम दृष्ट्या गैरकानूनी बताते हुए ईओडब्ल्यू जांच पर रोक लगाई, आयोग से जवाब तलब।
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Bureau News Desk
29 Apr 2026
01:59 PM
1 min read
मदरसों की जांच पर हाईकोर्ट सख्त - एनएचआरसी को फटकार, ईओडब्ल्यू जांच पर अंतरिम रोक
हाइलाइट्स
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एनएचआरसी के मदरसों की जांच के आदेश को प्रथम दृष्ट्या गैरकानूनी बताते हुए ईओडब्ल्यू जांच पर रोक लगाई, आयोग से जवाब तलब।

उत्तर प्रदेश में मदरसों की जांच को लेकर चल रहे विवाद के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एनएचआरसी के आदेशों पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने 588 अनुदानित मदरसों की ईओडब्ल्यू से कराई जा रही जांच पर अंतरिम रोक लगाते हुए आयोग से जवाब तलब किया है।

 

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा दिया गया जांच आदेश प्रथमदृष्ट्या कानून के अनुरूप नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आयोग अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई करता प्रतीत हो रहा है। डिवीजन बेंच के एक सदस्य जस्टिस अतुल श्रीधरन ने अपने आदेश में आयोग की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जब मॉब लिंचिंग जैसी घटनाएं सामने आती हैं, तब आयोग अक्सर सक्रिय नहीं दिखता, जबकि इस मामले में वह अपने दायरे से बाहर जाकर आदेश दे रहा है। हालांकि, बेंच के दूसरे सदस्य जस्टिस विवेक सरन ने इस टिप्पणी के कुछ हिस्सों से असहमति जताई और खुद को उससे अलग कर लिया। इस मतभेद के चलते मामले के आगे बड़ी बेंच को सौंपे जाने की संभावना जताई जा रही है। 

 

यह विवाद फरवरी 2026 के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें एनएचआरसी ने शिकायत के आधार पर उत्तर प्रदेश के 588 मदरसों में कथित अनियमितताओं की जांच ईओडब्ल्यू से कराने के निर्देश दिए थे। राज्य सरकार ने इस आदेश को लागू करते हुए जांच प्रक्रिया शुरू कर दी थी।मदरसा टीचर्स एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि एनएचआरसी को वित्तीय या आपराधिक जांच के आदेश देने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। अदालत ने इस दलील पर सहमति जताते हुए कहा कि मामला प्रथमदृष्ट्या आयोग के अधिकार क्षेत्र से बाहर का है।

 

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ‘मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993’ के तहत एनएचआरसी का दायरा जीवन, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा से जुड़े मामलों तक सीमित है। ऐसे में किसी संस्थान की वित्तीय जांच का आदेश देना, जब तक प्रत्यक्ष मानवाधिकार उल्लंघन न हो, उचित नहीं माना जा सकता। अदालत ने एनएचआरसी से विस्तृत जवाब मांगा है और फिलहाल जांच प्रक्रिया पर रोक जारी रहेगी। मामले की अगली सुनवाई में आगे की कानूनी दिशा तय होगी।

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