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अयोध्या भूमि अधिग्रहण पर हाई कोर्ट की रोक, सरकार को दिए सख्त निर्देश

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने अयोध्या में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए सरकार और प्रशासन को यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए।
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Bureau News Desk
23 Apr 2026
11:07 AM
1 min read
अयोध्या भूमि अधिग्रहण पर हाई कोर्ट की रोक, सरकार को दिए सख्त निर्देश
हाइलाइट्स
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने अयोध्या में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए सरकार और प्रशासन को यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए।

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने अयोध्या में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर अहम हस्तक्षेप करते हुए तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अदालत ने राज्य सरकार, जिला प्रशासन और अन्य संबंधित पक्षों को निर्देश दिया है कि संबंधित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखी जाए। अयोध्या में उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद की विभिन्न योजनाओं के लिए जारी भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह अंतरिम आदेश पारित किया। मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को निर्धारित की गई है।

 

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मनजीव शुक्ला की खंडपीठ ने 11 समान याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से दलीलें पूरी कर ली गईं, लेकिन राज्य सरकार के आवास एवं शहरी विकास विभाग, अयोध्या के जिलाधिकारी और परिषद की ओर से पेश वकील अपनी दलीलें शुरू नहीं कर सके। अदालत ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मामला लंबे समय से लंबित है और अनावश्यक स्थगन उचित नहीं है। पीठ ने निर्देश दिया कि यदि अगली सुनवाई में भी पक्षकार दलीलें पेश करने में असमर्थ रहते हैं, तो वे लिखित दलीलें दाखिल करें।

 

याचिकाकर्ताओं ने अदालत में कहा कि अयोध्या में भूमि अधिग्रहण उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद अधिनियम, 1965 के तहत किया जा रहा है, जो वर्तमान कानूनों की तुलना में कम लाभकारी है। उन्होंने तर्क दिया कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजे एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 अधिक मुआवजा, पुनर्वास, पुनर्स्थापन और सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान उपलब्ध कराता है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, 1965 के अधिनियम के तहत अधिग्रहण करने से किसानों और जमीन मालिकों को इन अतिरिक्त लाभों से वंचित होना पड़ सकता है, जिससे जमीन कम कीमत पर अधिग्रहित होने का खतरा है।

 

खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया 1965 के अधिनियम के तहत अधिग्रहण की प्रक्रिया, वर्ष 2013 के कानून की तुलना में कम लाभकारी प्रतीत होती है। इसी आधार पर अदालत ने वर्ष 2020 और उसके बाद जारी अधिसूचनाओं के तहत शुरू की गई भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर रोक लगाने का आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि संबंधित भूमि पर किसी भी प्रकार की स्थिति में बदलाव न किया जाए और सभी पक्ष यथास्थिति बनाए रखें। साथ ही, अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार की अधिग्रहण प्रक्रिया आगे न बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

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