रामनवमी के अवसर पर अयोध्या में अभूतपूर्व भीड़ उमड़ी, जिसके चलते पूरी रामनगरी को सुरक्षा के लिहाज से हाई अलर्ट पर रखा गया। सरयू घाटों से लेकर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दिनभर बनी रहीं। प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय व्यवस्था लागू की।
सुबह से ही लाखों श्रद्धालु सरयू नदी में आस्था की डुबकी लगाने पहुंचे। राम की पैड़ी और आसपास के घाटों पर करीब आधा किलोमीटर तक भीड़ का दबाव बना रहा। स्नान के बाद श्रद्धालु मंदिरों की ओर बढ़े, जिससे प्रमुख मार्गों पर आवागमन बढ़ गया।
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने शहर को 6 जोन और 29 सेक्टर में विभाजित किया। प्रत्येक सेक्टर में पुलिस बल, पीएसी, मजिस्ट्रेट और खुफिया इकाइयों की तैनाती की गई। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त फोर्स लगाई गई, जबकि प्रवेश और निकास मार्गों पर विशेष निगरानी रखी गई। तकनीकी निगरानी के तहत ड्रोन कैमरों, सैकड़ों सीसीटीवी और इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम के माध्यम से रियल टाइम मॉनिटरिंग की गई।
राम जन्मभूमि परिसर में दर्शन व्यवस्था सामान्य समय से पहले शुरू की गई और देर रात तक जारी रही। दोपहर 12 बजे रामलला के जन्म क्षण पर विशेष ‘सूर्य तिलक’ आयोजन हुआ, इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई।
साथ ही अयोध्या के लगभग 8000 मंदिरों में एक साथ राम जन्मोत्सव मनाया गया। कनक भवन, हनुमानगढ़ी और अन्य प्रमुख स्थलों पर भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजन चलते रहे।
भीड़ के दबाव को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमें, एंबुलेंस और आपात सेवाएं भी तैनात रहीं। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए डायवर्जन लागू रहा।
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