Sunday, 12 July 2026 | Lucknow | 29°C

पद्मश्री शायर बशीर बद्र का निधन, 91 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

संवेदनशील गजलों और यादगार शेरों से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले पद्मश्री बशीर बद्र के निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर।
Bureau
Bureau News Desk
28 May 2026
08:59 PM
1 min read
पद्मश्री शायर बशीर बद्र का निधन, 91 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस
हाइलाइट्स
संवेदनशील गजलों और यादगार शेरों से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले पद्मश्री बशीर बद्र के निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर।

 

देश के मशहूर शायर और पद्मश्री सम्मानित बशीर बद्र का 91 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। अपनी कालजयी गजलों और दिल को छू लेने वाले शेरों के जरिए उन्होंने हिंदी-उर्दू साहित्य की दुनिया में खास पहचान बनाई थी। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद साहित्य जगत और शायरी प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई है।

 

अपने चर्चित शेरों के जरिए बशीर बद्र ने देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोकप्रियता हासिल की थी। उनकी शायरी की सबसे बड़ी खासियत सरल भाषा, गहरी संवेदनशीलता और आम लोगों की भावनाओं से जुड़ाव रही। बशीर बद्र का पैतृक घर उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले के बसखारी ब्लॉक के बुकिया गांव में था। हालांकि, दशकों पहले ही उनके परिवार का गांव से सीधा संबंध टूट गया था। बावजूद इसके जिले के साहित्यिक और सांस्कृतिक जगत में उनके प्रति विशेष सम्मान बना रहा।

 

बशीर बद्र का असली नाम सैयद मोहम्मद बशीर था। उनका जन्म 15 फरवरी 1935 को कानपुर में हुआ था। उनके पिता सैयद मोहम्मद नजीर पुलिस विभाग में कार्यरत थे। शुरुआती पढ़ाई कानपुर के हलीम मुस्लिम कॉलेज में हुई। बाद में पिता के तबादले के चलते परिवार इटावा चला गया। मोहम्मद सिद्दीक इस्लामिया कॉलेज से हाईस्कूल की पढ़ाई के दौरान ही उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद उनकी शिक्षा प्रभावित हुई। आर्थिक परिस्थितियों के चलते उन्होंने पुलिस विभाग में 85 रुपये मासिक वेतन पर नौकरी शुरू की। इसी दौरान उनकी शादी चचेरी बहन कमर जहां से हुई।

 

बशीर बद्र की साहित्यिक यात्रा धीरे-धीरे आगे बढ़ती रही। उनके लेख और रचनाएं नियाज फतेहपुरी की प्रसिद्ध पत्रिका ‘निगार’ में प्रकाशित होने लगीं। वर्ष 1967 में उन्होंने पुलिस विभाग की नौकरी छोड़ दी। इसके बाद विश्वविद्यालय से मिलने वाले वजीफे और मुशायरों से होने वाली आय के जरिए उन्होंने परिवार का पालन-पोषण किया। उन्होंने वर्ष 1974 में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की और बाद में अलीगढ़ में अध्यापन कार्य शुरू किया। इसके बाद उनकी नियुक्ति मेरठ यूनिवर्सिटी में हुई। निजी जीवन में भी उन्होंने कई कठिन दौर देखे। वर्ष 1984 में उनकी पहली पत्नी का निधन हो गया। वहीं, 1987 के मेरठ दंगों में उनका घर लूट लिया गया था।

 

बाद में उन्होंने भोपाल की डॉक्टर राहत सुल्ताना से विवाह किया और वहीं स्थायी रूप से बस गए। भोपाल में रहते हुए भी उन्होंने शायरी और साहित्य की दुनिया में अपनी सक्रियता बनाए रखी। अंबेडकरनगर के मशहूर शायर डॉ. हसन सईद जलालपुरी, मसहद जलालपुरी और शहकार जलालपुरी समेत कई साहित्यकारों ने बशीर बद्र के निधन को साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।

 

बशीर बद्र की गजलें और शेर आज भी मुशायरों, साहित्यिक मंचों और सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से पढ़े और साझा किए जाते हैं। उनकी रचनाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।

Explore Related Topics

शीर बद्र निधन Bashir Badr Death पद्मश्री बशीर बद्र

 

टिप्पणियाँ

टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें

इस खबर को खबर पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद

ऐसी ही खबरों के लिए निचे स्क्रॉल करें

या होम पेज पर लेटेस्ट न्यूज़ पढ़ने के लिए क्लिक करें →

Related News