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भारत की क्रेडिट इकॉनमी हुई मजबूत, लोन डिफॉल्ट घटे और बाजार 137 लाख करोड़ के पार

एक्सपीरियन रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, गोल्ड लोन और पर्सनल लोन की मांग में तेज उछाल; NBFC और फिनटेक ने बढ़ाई पहुंच।
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Bureau News Desk
27 May 2026
05:42 PM
1 min read
भारत की क्रेडिट इकॉनमी हुई मजबूत, लोन डिफॉल्ट घटे और बाजार 137 लाख करोड़ के पार
हाइलाइट्स
एक्सपीरियन रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, गोल्ड लोन और पर्सनल लोन की मांग में तेज उछाल; NBFC और फिनटेक ने बढ़ाई पहुंच।

 

भारत की क्रेडिट इकॉनमी में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान मजबूती देखने को मिली है। वैश्विक डेटा और टेक्नोलॉजी कंपनी एक्सपेरियन की  रिपोर्ट के मुताबिक देश का रिटेल क्रेडिट बाजार मार्च 2026 तक बढ़कर 137 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। यह पिछले साल के मुकाबले 19 प्रतिशत अधिक है।

 

रिपोर्ट के अनुसार देश में नए लोन की सॉर्सिंग भी तेज रफ्तार से बढ़ी है। FY26 के दौरान कुल नई लोन सॉर्सिंग 31 प्रतिशत बढ़कर 75 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इसके साथ ही लोन डिफॉल्ट में कमी दर्ज की गई है, जो बेहतर एसेट क्वालिटी और मजबूत भुगतान अनुशासन का संकेत माना जा रहा है।

 

एक्सपीरियन की रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च 2026 तक नेट 30+ डिलिंक्वेंसी घटकर करीब 3 प्रतिशत रह गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में कम है। रिपोर्ट के मुताबिक मजबूत अंडरराइटिंग, जिम्मेदार लेंडिंग और समय पर भुगतान की वजह से बैंकों और वित्तीय संस्थानों की एसेट क्वालिटी में सुधार हुआ है।

 

रिपोर्ट में सिक्योर्ड लोन की बढ़ती हिस्सेदारी को भी प्रमुख ट्रेंड बताया गया है। खासकर गोल्ड लोन और होम लोन में तेजी दर्ज की गई। मार्च 2026 तक गोल्ड लोन का AUM 47 प्रतिशत बढ़कर 11.9 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। FY26 की चौथी तिमाही में गोल्ड लोन सॉर्सिंग में 115 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई।

 

रिपोर्ट के अनुसार बढ़ती सोने की कीमतों और आसान प्रोसेसिंग के कारण गोल्ड लोन की मांग तेजी से बढ़ी है। इसके जरिए नए ग्राहकों को औपचारिक क्रेडिट सिस्टम से जोड़ने में भी मदद मिली है। महिलाओं और छोटे कारोबारियों के बीच भी गोल्ड लोन की पहुंच बढ़ने की बात रिपोर्ट में कही गई है।

 

अनसिक्योर्ड लेंडिंग में भी FY26 के दौरान मजबूत वापसी दर्ज की गई। पर्सनल लोन और कंज्यूमर फाइनेंस उत्पादों की मांग में तेजी देखने को मिली। मार्च 2026 तक पर्सनल लोन का AUM 15 प्रतिशत बढ़कर 16.1 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि नए पर्सनल लोन की सॉर्सिंग में 32 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

 

रिपोर्ट में कहा गया है कि टियर-2, टियर-3 और टियर-4 शहरों में डिजिटल पहुंच बढ़ने और फिनटेक प्लेटफॉर्म के विस्तार के कारण पर्सनल लोन की मांग तेजी से बढ़ रही है। छोटे टिकट साइज वाले लोन में एनबीएफसी कंपनियों की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।

 

क्रेडिट कार्ड बाजार में भी सुधार के संकेत मिले हैं। मार्च 2026 तक क्रेडिट कार्ड AUM 3.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 2 प्रतिशत अधिक है। नए कार्ड जारी करने की गति में भी 5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

 

होम लोन बाजार में स्थिर बढ़ोतरी देखने को मिली। मार्च 2026 तक होम लोन AUM 43 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं ऑटो लोन बाजार भी 15 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 9.2 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। रिपोर्ट के अनुसार प्रीमियम वाहनों की मांग बढ़ने से ऑटो लोन के औसत टिकट साइज में भी बढ़ोतरी हुई है।

 

कंज्यूमर ड्यूरेबल और टू-व्हीलर लोन सेगमेंट में भी लगातार विस्तार दर्ज किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि एनबीएफसी कंपनियां तेज प्रोसेसिंग और व्यापक पहुंच के कारण इन क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं।

 

मनीष जैन ने कहा, भारत का वित्तीय इकोसिस्टम मजबूत आर्थिक गतिविधियों और बढ़ते भरोसे के साथ आगे बढ़ रहा है। डिजिटल इनोवेशन और डेटा आधारित लेंडिंग मॉडल क्रेडिट पहुंच को तेजी से विस्तार दे रहे हैं।

 

रिपोर्ट के मुताबिक पब्लिक सेक्टर बैंक सुरक्षित लोन श्रेणियों, खासकर होम लोन में अपनी स्थिति मजबूत बनाए हुए हैं, जबकि एनबीएफसी और फिनटेक कंपनियां अनसिक्योर्ड और कंज्यूमर आधारित लेंडिंग में ग्रोथ को आगे बढ़ा रही हैं। 

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