Sunday, 12 July 2026 | Lucknow | 29°C

नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद का रामभद्राचार्य पर तीखा प्रहार

UP Politics: बरेली में प्रबुद्ध सम्मेलन के मंच से चंद्रशेखर आजाद ने रामभद्राचार्य के "मिनी पाकिस्तान" बयान पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा - "संत की न जाति होती है, न धर्म, वह सबका होता है।" उन्होंने चेतावनी दी कि संविधान खतरे में है और इसे बचाने के लिए जनता को अब एकजुट होना ही होगा।
News Desk
News Desk News Desk
17 Sep 2025
11:03 PM
1 min read
नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद का रामभद्राचार्य पर तीखा प्रहार
हाइलाइट्स
UP Politics: बरेली में प्रबुद्ध सम्मेलन के मंच से चंद्रशेखर आजाद ने रामभद्राचार्य के "मिनी पाकिस्तान" बयान पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा - "संत की न जाति होती है, न धर्म, वह सबका होता है।" उन्होंने चेतावनी दी कि संविधान खतरे में है और इसे बचाने के लिए जनता को अब एकजुट होना ही होगा।


>आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने बरेली पहुंचे प्रबुद्ध सम्मेलन में केंद्र और संत समाज दोनों पर तीखे प्रहार किए। पश्चिमी यूपी को "मिनी पाकिस्तान" कहने वाले जगद्गुरु रामभद्राचार्य के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, "संत की ना कोई जाति होती है और ना ही धर्म, संत सबका होता है।" मेरठ के 1857 की क्रांति से जुड़े गौरवशाली इतिहास को गलत तरीके से संबोधित करना उन्होंने अनुचित बताया।


>व्यंग्य करते हुए आजाद ने कहा कि सुना है रामभद्राचार्य जन्म से देख नहीं पाते, और शायद यह उनके पिछले जन्मों के कर्मों का परिणाम है। उन्होंने तंज कसते हुए सवाल किया कि किसी संत से समाज को जोड़ने और प्रेरित करने की अपेक्षा होती है, न कि समाज को बांटने की।


>सम्मेलन में चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि आज भारत का संविधान खतरे में है और इसे बचाने की जिम्मेदारी जनता की है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले चुनावों में उनकी पार्टी बरेली की सभी सीटों पर मजबूत चुनौती पेश करेगी।


>आजाद ने चुनावी प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि देश में लंबे समय से ईवीएम से मतदान हो रहा है, लेकिन जनता का उस पर भरोसा लगातार कमजोर हुआ है। उन्होंने यह सवाल लोगों के सामने रखा कि आखिर जनता को बैलेट पेपर से चुनाव का विकल्प क्यों नहीं दिया जाता।


>चंद्रशेखर आजाद ने जातिगत गणना पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि 1971 के बाद से अब तक व्यापक जातिगत जनगणना नहीं हुई। केवल एससी-एसटी की गणना तक ही सीमित रहना समाज के साथ अन्याय है। उन्होंने मांग की कि जातिगत गणना के साथ आर्थिक आंकड़े भी जारी किए जाएं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किस वर्ग के पास कितना संसाधन है और किसे किस स्तर का अवसर मिल रहा है।

 

टिप्पणियाँ

टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें

इस खबर को खबर पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद

ऐसी ही खबरों के लिए निचे स्क्रॉल करें

या होम पेज पर लेटेस्ट न्यूज़ पढ़ने के लिए क्लिक करें →

Related News