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सीएम योगी ने संत शिरोमणि साईं चांडूराम जी को दी अंतिम श्रद्धांजलि

Lucknow News: लखनऊ में आज श्रद्धा और भावनाओं का माहौल उस वक्त गहरा गया जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संत शिरोमणि साईं चांडूराम जी के अंतिम दर्शन किए।
News Desk
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16 Oct 2025
05:08 AM
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सीएम योगी ने संत शिरोमणि साईं चांडूराम जी को दी अंतिम श्रद्धांजलि
हाइलाइट्स
Lucknow News: लखनऊ में आज श्रद्धा और भावनाओं का माहौल उस वक्त गहरा गया जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संत शिरोमणि साईं चांडूराम जी के अंतिम दर्शन किए।


>उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को लखनऊ स्थित शिव शांति आश्रम पहुंचकर सिंधी समाज के प्रमुख धर्मगुरु संत शिरोमणि साईं चांडूराम जी के पार्थिव शरीर के दर्शन किए और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।


>मुख्यमंत्री ने इस दौरान संत शिरोमणि के पार्थिव शरीर पर केसरिया अंग वस्त्र ओढ़ाया और पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। उन्होंने शोकसंतप्त अनुयायियों और श्रद्धालुओं के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।


>मुख्यमंत्री योगी ने संत शिरोमणि साईं चांडूराम जी के निधन को “आध्यात्मिक जगत की अपूरणीय क्षति” बताया। उन्होंने कहा कि साईं चांडूराम जी का जीवन मानवता, प्रेम, और सेवा की प्रेरणा था। उन्होंने समाज में एकता और सद्भाव का संदेश दिया, जिसे पीढ़ियों तक याद रखा जाएगा।


>योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “सिंधी समाज के प्रमुख धर्मगुरु, पूज्य श्री शांति आश्रम के पीठाधीश्वर, संत शिरोमणि साईं चांडूराम साहिब जी का निधन अत्यंत दुखद है। भगवान झूलेलाल से प्रार्थना है कि वे पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और अनुयायियों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।”


>मुख्यमंत्री योगी के आगमन के दौरान शिव शांति आश्रम परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। वातावरण में “साईं चांडूराम अमर रहें” के जयघोष गूंज उठे। श्रद्धालुओं ने मोमबत्तियां जलाकर और पुष्प अर्पित कर संत शिरोमणि को अंतिम विदाई दी। साईं चांडूराम जी के अनुयायियों ने उनके उपदेशों और आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया और कहा कि वे उनके बताए मार्ग को जन-जन तक पहुंचाएंगे।


>संत शिरोमणि साईं चांडूराम जी अपने जीवनभर धर्म, प्रेम और मानवता की सेवा में समर्पित रहे। उन्होंने सिंधी समाज के धार्मिक पुनर्जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अपने प्रवचनों से हजारों लोगों को आध्यात्मिक मार्ग पर प्रेरित किया। उनका ब्रह्मलीन होना न केवल सिंधी समाज के लिए बल्कि पूरे देश के आध्यात्मिक समुदाय के लिए एक बड़ी क्षति है।

 

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