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सीएम योगी ने किया जल संरक्षण का अभियान तेज, भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य, तालाबों से मिट्टी निकालने की मिली छूट

UP News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने के निर्देश दिए हैं, जिसमें भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य करने और तालाबों से मिट्टी निकालने की छूट शामिल है।
News Desk
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04 Oct 2025
04:03 AM
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सीएम योगी ने किया जल संरक्षण का अभियान तेज, भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य, तालाबों से मिट्टी निकालने की मिली छूट
हाइलाइट्स
UP News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने के निर्देश दिए हैं, जिसमें भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य करने और तालाबों से मिट्टी निकालने की छूट शामिल है।


>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में प्रदेश में जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जल संकट केवल स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चुनौती बन चुका है। इसके समाधान के लिए चेक डैम, तालाब और ब्लास्टकूप निर्माण एवं जीर्णोद्धार को तेज किया जा रहा है, जो वर्षा जल संचयन और भूजल रिचार्ज में सहायक हैं।


>मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी 100 वर्ग मीटर से बड़े भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था अनिवार्य हो। साथ ही तालाबों से कुम्हारों को 1 अप्रैल से 15 जून तक मुफ्त मिट्टी निकालने की अनुमति दी जाए, ताकि बरसात से पहले तालाब पूरी तरह तैयार हों। इसके बाद इन्हें मत्स्य पालन और सिंघाड़ा उत्पादन के लिए उपयोग में लाकर रोजगार के अवसर सृजित किए जाएंगे।


>सीएम योगी ने बताया कि प्रदेश में अब तक 6,448 चेकडैम बनाए गए हैं, जिनसे कुल 1,28,960 हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचन क्षमता विकसित हुई है। इसी तरह 16,610 तालाबों में से 1,343 का जीर्णोद्धार किया गया और 6,192 ब्लास्टकूप के माध्यम से 18,576 हेक्टेयर सिंचन क्षमता सृजित की गई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर जिले में जल संरचनाओं का फोटोग्राफिक डॉक्यूमेंटेशन कराते हुए जनता को जागरूक किया जाए।


>सीएम योगी ने यह भी स्पष्ट किया कि जैसे "एक पेड़ मां के नाम" अभियान ने वृक्षारोपण को जन आंदोलन बनाया, वैसे ही चेकडैम, तालाब और ब्लास्टकूप निर्माण को भी सामूहिक प्रयासों के माध्यम से प्रदेश में बड़े पैमाने पर संचालित किया जाएगा। इसका उद्देश्य न केवल जल संकट से निपटना है, बल्कि कृषि, मत्स्य पालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देना है।

 

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