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19,425 खरीदार, 2,004 करोड़ रुपये और अधूरे प्रोजेक्ट - अर्थ ग्रुप के चार प्रमोटर गिरफ्तार

एनसीआर, लखनऊ और लुधियाना समेत कई शहरों के प्रोजेक्ट्स से जुड़े मामले में ईडी की कार्रवाई, हजारों खरीदारों के निवेश की जांच तेज।
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Bureau News Desk
02 Jun 2026
10:43 PM
1 min read
19,425 खरीदार, 2,004 करोड़ रुपये और अधूरे प्रोजेक्ट - अर्थ ग्रुप के चार प्रमोटर गिरफ्तार
हाइलाइट्स
एनसीआर, लखनऊ और लुधियाना समेत कई शहरों के प्रोजेक्ट्स से जुड़े मामले में ईडी की कार्रवाई, हजारों खरीदारों के निवेश की जांच तेज।

अर्थ ग्रुप के चार प्रमोटर गिरफ्तार - इमेज सोर्स (एआई) 

 

प्रवर्तन निदेशालय ने रियल एस्टेट कंपनी अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच में बड़ी कार्रवाई करते हुए कंपनी के चार प्रमोटर और निदेशकों को गिरफ्तार किया है। एजेंसी के अनुसार, कंपनी पर देश के विभिन्न शहरों में आवासीय और वाणिज्यिक परियोजनाओं के नाम पर हजारों खरीदारों और निवेशकों से धन जुटाने तथा उसके कथित दुरुपयोग के आरोप हैं।

 

ईडी के दिल्ली जोनल कार्यालय ने अवधेश कुमार गोयल, रजनीश मित्तल, अतुल गुप्ता और विकास गुप्ता की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। चारों को धन शोधन निवारण अधिनियम यानी पीएमएलए  के तहत गिरफ्तार किया गया है और विशेष अदालत से पांच दिन की रिमांड प्राप्त की गई है।

 

पांच एफआईआर के आधार पर शुरू हुई जांच: यह जांच दिल्ली पुलिस की इकनोमिक ऑफेंस विंग द्वारा दर्ज की गई पांच एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। इन मामलों में अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर, उसके निदेशकों और संबंधित संस्थाओं के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे। जांच के दौरान आर्थिक अपराध शाखा ने आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी। अब मनी लॉन्ड्रिंग पहलुओं की जांच के तहत ईडी ने दोबारा कार्रवाई की है।

 

19,425 खरीदारों से 2,004 करोड़ रुपये जुटाने का आरोप: ईडी की जांच में सामने आया है कि अर्थ ग्रुप ने विभिन्न आवासीय और वाणिज्यिक परियोजनाओं में समय पर डिलीवरी और निश्चित रिटर्न का वादा कर 19,425 से अधिक खरीदारों और निवेशकों से लगभग 2,004 करोड़ रुपये जुटाए। एजेंसी का आरोप है कि खरीदारों से जुटाई गई राशि का एक बड़ा हिस्सा परियोजनाओं पर खर्च करने के बजाय अन्य कंपनियों और संबंधित व्यक्तियों के खातों में स्थानांतरित किया गया।

 

467 करोड़ रुपये के फंड डायवर्जन का आरोप: ईडी के अनुसार, लगभग 467 करोड़ रुपये समूह की अन्य कंपनियों और संबंधित पक्षों के खातों में ट्रांसफर किए गए। जांच एजेंसी का मानना है कि यह धन परियोजनाओं से हटाकर अन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया गया। जेंसी यह भी जांच कर रही है कि कथित तौर पर जुटाई गई राशि का उपयोग चल और अचल संपत्तियों की खरीद में किया गया या नहीं।

 

खरीदारों को नहीं मिला पजेशन: जांच एजेंसी के मुताबिक, बड़ी संख्या में खरीदारों ने परियोजनाओं में निवेश किया, लेकिन कई प्रोजेक्ट अधूरे रह गए या समय पर पजेशन नहीं दिया गया। इससे हजारों निवेशकों और घर खरीदारों की राशि लंबे समय से फंसी हुई है। मामले से जुड़े कई खरीदार वर्षों से विभिन्न न्यायिक और प्रशासनिक मंचों पर राहत की मांग कर रहे हैं।

 

एनसीएलटी प्रक्रिया छह साल बाद भी लंबित: मामला राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण यानी एनसीएलटी तक भी पहुंचा। हालांकि सामान्यतः 18 महीने के भीतर पूरी होने वाली प्रक्रिया छह वर्षों से अधिक समय बाद भी अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी है। लंबित प्रक्रिया के कारण प्रभावित खरीदारों और निवेशकों को अब तक अंतिम समाधान नहीं मिल पाया है।

 

एसएफआईओ ने भी दर्ज की थी शिकायत: इस मामले में केवल ईडी और आर्थिक अपराध शाखा ही नहीं, बल्कि एसएफआईओ ने भी कंपनी अधिनियम की धारा 447 के तहत आपराधिक शिकायत दर्ज की थी। इससे स्पष्ट होता है कि मामले की जांच विभिन्न एजेंसियों द्वारा अलग-अलग पहलुओं से की जा रही है। इससे पहले अप्रैल में ईडी ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में अर्थ ग्रुप से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था।

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