राजधानी लखनऊ के बख्शी का तालाब (बीकेटी) क्षेत्र स्थित कठवारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) की बदहाल स्थिति अब दो अलग-अलग माध्यमों से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों तक पहुंच गई है। एक ओर ग्रामीणों ने रक्षा मंत्री एवं लखनऊ सांसद राजनाथ सिंह को ज्ञापन भेजकर अस्पताल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में उच्चीकृत करने की मांग की है, वहीं दूसरी ओर पीएचसी के अधीक्षक डॉ. जेपी सिंह ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को पत्र लिखकर जर्जर भवन, बारिश के दौरान जलभराव और अस्पताल संचालन में आने वाली कठिनाइयों से अवगत कराया है।
ग्रामीणों और अस्पताल प्रशासन की ओर से अलग-अलग स्तर पर उठाई गई इन आवाजों ने क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े बुनियादी ढांचे की स्थिति को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
कठवारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की इमारत बारिश के मौसम में सबसे अधिक प्रभावित होती है। अधीक्षक द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार, वर्षा के दौरान अस्पताल के कमरों में पानी भर जाता है और कई स्थानों पर छत से रिसाव शुरू हो जाता है। इससे मरीजों के उपचार के साथ-साथ अस्पताल के नियमित संचालन में भी बाधा आती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार वार्ड और उपचार कक्षों में जलभराव होने के कारण मरीजों को दूसरे कमरों में स्थानांतरित करना पड़ता है। फर्श पर जमा पानी संक्रमण का खतरा बढ़ाने के साथ-साथ मरीजों, तीमारदारों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए भी असुविधा का कारण बनता है।
ग्रामीणों द्वारा रक्षा मंत्री एवं लखनऊ सांसद राजनाथ सिंह को भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है कि क्षेत्र की आबादी लगातार बढ़ रही है, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार उसी अनुपात में नहीं हो पाया है। वर्तमान में हजारों लोग सीमित संसाधनों वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर हैं।
ज्ञापन में मांग की गई है कि कठवारा पीएचसी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में उच्चीकृत किया जाए, ताकि क्षेत्र के लोगों को विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, बेहतर जांच सुविधाएं और चौबीस घंटे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
दूसरी ओर, पीएचसी अधीक्षक डॉ. जेपी सिंह ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भेजी अपनी रिपोर्ट में अस्पताल भवन की वर्तमान स्थिति का विस्तृत उल्लेख किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बरसात के दौरान जलभराव और छत से रिसाव के कारण अस्पताल में मरीजों के उपचार और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। रिपोर्ट में भवन की स्थिति को देखते हुए आवश्यक कार्रवाई और सुधारात्मक कदम उठाने का अनुरोध भी किया गया है।
कठवारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र केवल एक गांव तक सीमित नहीं है। आसपास के लगभग 15 से 20 गांवों की बड़ी आबादी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए इसी केंद्र पर निर्भर रहती है।
यहां प्रतिदिन सामान्य ओपीडी सेवाएं, टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच, बच्चों का उपचार तथा अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन की जर्जर स्थिति और सीमित संसाधनों का असर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी दिखाई देता है।
ग्रामीणों ने अपने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया है कि क्षेत्र में स्थित मां चंद्रिका देवी मंदिर में वर्षभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। विशेष अवसरों, मेलों और धार्मिक आयोजनों के दौरान यहां लाखों लोगों की आवाजाही होती है।
ऐसे समय किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति से निपटने के लिए क्षेत्र में सुदृढ़ चिकित्सा व्यवस्था की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि मौजूदा संसाधनों के साथ अस्पताल पर बढ़ते दबाव का प्रभावी ढंग से सामना करना कठिन हो सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मामला केवल एक जर्जर भवन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे ग्रामीण स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत करने से जुड़ा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते अस्पताल भवन के पुनर्निर्माण और उच्चीकरण की दिशा में आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक प्रभावित हो सकती हैं।
वर्तमान में कठवारा पीएचसी को लेकर दो अलग-अलग स्तरों पर पहल हुई है। एक ओर ग्रामीणों ने रक्षा मंत्री एवं सांसद राजनाथ सिंह को ज्ञापन भेजकर अस्पताल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में परिवर्तित करने की मांग की है, वहीं दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन ने भी मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भवन की स्थिति से अवगत कराते हुए आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया है।
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