राजधानी लखनऊ के केजीएमयू से जुड़े एक मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अंबेडकर नगर निवासी एक महिला की इलाज के दौरान मौत के बाद परिजनों ने केजीएमयू के एक सीनियर रेजिडेंट और कृष्णानगर स्थित निजी एसवीएम अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का दावा है कि महिला को बेहतर इलाज का भरोसा देकर निजी अस्पताल भेजा गया, जहां सर्जरी के बाद कथित तौर पर गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ा दिया गया, जिससे उनकी हालत बिगड़ गई और बाद में मौत हो गई।
अंबेडकर नगर निवासी विनय दुबे के अनुसार, उनकी पत्नी कमलेश देवी को छह जून को इलाज के लिए केजीएमयू में भर्ती कराया गया था। उनका आरोप है कि अस्पताल में अपेक्षित उपचार नहीं मिलने के बाद हड्डी रोग विभाग के एक सीनियर रेजिडेंट ने बेहतर इलाज का आश्वासन देते हुए उन्हें कृष्णानगर स्थित एसवीएम अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी। परिजनों का आरोप है कि निजी अस्पताल पहुंचने के बाद इलाज के नाम पर धनराशि जमा कराई गई और बाद में सर्जरी की गई।
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परिजनों के मुताबिक, 16 जून को महिला की सर्जरी की गई। इसके बाद खून की आवश्यकता बताई गई और डोनर की व्यवस्था करने के लिए कहा गया। आरोप है कि महिला को एक यूनिट ए-पॉजिटिव रक्त चढ़ाया गया, जबकि उनका ब्लड ग्रुप बी-पॉजिटिव था। विनय दुबे का कहना है कि बाद में जब दो और यूनिट खून की व्यवस्था की जा रही थी, तब ब्लड बैंक में मरीज का ब्लड ग्रुप बी-पॉजिटिव बताया गया। इसके बाद खून के ग्रुप को लेकर विवाद सामने आया। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ इस मामले में अपनी गलती स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे।
परिजनों के अनुसार, महिला की हालत लगातार बिगड़ने लगी तो उन्हें आनन-फानन में केजीएमयू ट्रामा सेंटर के आईसीयू में भर्ती कराया गया। वहां इलाज के दौरान शनिवार को उनकी मौत हो गई। मृतका के पति विनय दुबे ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
विनय दुबे का आरोप है कि एसवीएम अस्पताल में भर्ती के समय 45 हजार रुपये जमा कराए गए थे, जिसमें 11 हजार रुपये का भुगतान ऑनलाइन किया गया था। इसके बाद सर्जरी और खून की व्यवस्था के लिए अलग से कहा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इलाज के दौरान कई स्तरों पर लापरवाही बरती गई, जिसकी वजह से उनकी पत्नी की जान चली गई।
मामले में नाम सामने आने के बाद संबंधित सीनियर रेजिडेंट ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि मरीज के पति ने उनके एक परिचित के माध्यम से संपर्क किया था और ट्रामा सेंटर के आईसीयू में बेड दिलाने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि मानवता के आधार पर उन्होंने वरिष्ठ चिकित्सकों से बात कर मरीज के लिए आईसीयू में बेड उपलब्ध कराने में मदद की थी। रेजिडेंट डॉक्टर का कहना है कि निजी अस्पताल में मरीज किस तरह पहुंची और वहां क्या उपचार हुआ, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि उनके खिलाफ कोई साक्ष्य हैं तो उन्हें प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी मरीज को गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ाना गंभीर चिकित्सीय स्थिति पैदा कर सकता है। ऐसी स्थिति में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली बाहरी रक्त को स्वीकार नहीं कर पाती और उसके खिलाफ प्रतिक्रिया शुरू हो जाती है। इससे रक्त कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है और गंभीर मामलों में हार्ट अटैक, किडनी फेल्योर, मल्टी ऑर्गन फेल्योर जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर मरीज की जान को भी खतरा हो सकता है।
केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि इस मामले में अभी तक कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। प्रशासन के अनुसार, यदि शिकायत मिलती है तो मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की जाएगी और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। मामले को लेकर चौक थाने में तहरीर दी गई है। पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है और तथ्यों के अनुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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