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लखनऊ के जोन-7 में सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल, कई इलाकों में कचरा और सीवर समस्या की शिकायत

इस्माइलगंज, प्रीतिनगर, पटेलनगर और मटियारी में ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान कचरे के ढेर, टूटी नालियां और जलनिकासी से जुड़ी समस्याएं सामने आईं
Bureau
Bureau News Desk
03 Jun 2026
09:02 PM
1 min read
लखनऊ के जोन-7 में सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल, कई इलाकों में कचरा और सीवर समस्या की शिकायत
हाइलाइट्स
इस्माइलगंज, प्रीतिनगर, पटेलनगर और मटियारी में ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान कचरे के ढेर, टूटी नालियां और जलनिकासी से जुड़ी समस्याएं सामने आईं

 

प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान के तहत देशभर में स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं राजधानी लखनऊ को भी देश के स्वच्छ शहरों में शामिल किए जाने का दावा किया जाता रहा है। हालांकि शहर के कुछ इलाकों में रहने वाले लोगों का कहना है कि जमीनी स्तर पर अभी भी कई समस्याएं बनी हुई हैं।

 

NDV Today की टीम ने लखनऊ नगर निगम के जोन-7 के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान स्माइलगंज, प्रीतिनगर और पटेलनगर समेत कई इलाकों में कचरा प्रबंधन, नालियों की स्थिति और सीवर व्यवस्था से जुड़ी शिकायतें सामने आईं।

 

पहले देखिये ये तस्वीरें:

 

 

 

 

 

इस्माइलगंज में नालियों और जलनिकासी की समस्या: ग्राउंड विजिट के दौरान स्माइलगंज क्षेत्र में कई स्थानों पर टूटी नालियां और खुले में बहता गंदा पानी देखा गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि जलनिकासी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, जिससे आसपास रहने वाले परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कुछ स्थानों पर धार्मिक स्थलों के आसपास भी नालियों का पानी बहता दिखाई दिया। स्थानीय निवासियों के अनुसार, बरसात के मौसम में स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है।  

 

 

 

प्रीतिनगर में खाली मैदान बने कचरा फेंकने की जगह: कामता क्षेत्र के प्रीतिनगर में टीम को कई स्थानों पर सड़क किनारे कचरा पड़ा मिला। इसके अलावा एक खाली मैदान में बड़ी मात्रा में ठोस कचरा जमा होने के दृश्य भी सामने आए। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नियमित सफाई और कचरा उठान की व्यवस्था प्रभावी रूप से नहीं होने के कारण समस्या बढ़ रही है। लोगों ने क्षेत्र में नियमित निगरानी और सफाई व्यवस्था मजबूत करने की मांग की।

 

पटेलनगर में भी सामने आई समान तस्वीर: पटेलनगर क्षेत्र में भी कुछ खाली भूखंडों और मैदानों में कचरे के ढेर दिखाई दिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि खुले स्थानों पर कचरा जमा होने से न केवल बदबू की समस्या बढ़ती है, बल्कि मच्छरों और अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। निवासियों के अनुसार, गर्मी और बारिश के मौसम में हालात और अधिक गंभीर हो जाते हैं।

 

घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था पर उठे सवाल: नगर निगम द्वारा घर-घर कचरा संग्रहण के लिए वाहन चलाए जाते हैं। हालांकि कुछ स्थानीय लोगों ने दावा किया कि कई इलाकों में यह सेवा नियमित रूप से नहीं पहुंचती, जिसके कारण लोग खुले स्थानों पर कचरा फेंकने को मजबूर हो जाते हैं। हालांकि इस संबंध में नगर निगम का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका।

 

हाल में हुई बारिश के बाद कई क्षेत्रों में जलभराव और गंदगी की शिकायतें सामने आईं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नालियों की सफाई और सीवर व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है ताकि बारिश के दौरान लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

 

स्वच्छ भारत अभियान के तहत शहरी क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था, कचरा प्रबंधन और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जाता है। नगर निकायों को नियमित सफाई, ठोस कचरा प्रबंधन और जलनिकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर उठ रही शिकायतें इन व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता को लेकर सवाल खड़े करती हैं।

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