लखनऊ की एमपी-एमएलए कोर्ट ने वर्ष 2004 में कैंट थाना क्षेत्र में हुए चर्चित मुख्तार अंसारी-कृष्णानंद राय फायरिंग मामले में 22 साल बाद फैसला सुनाते हुए पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह समेत पांच आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव को निर्णय का आधार बताया।
यह मामला 13 जनवरी 2004 का है, जब लखनऊ के सदर रेलवे क्रॉसिंग के पास दो प्रभावशाली गुटों जिसमे की मुख्तार अंसारी और कृष्णानंद राय के काफिले आमने-सामने आ गए थे। आरोप है कि इस दौरान दोनों पक्षों के बीच ताबड़तोड़ फायरिंग हुई थी, जिससे क्षेत्र में अफरा-तफरी और दहशत फैल गई थी।
घटना के बाद मुख्तार अंसारी की ओर से कृष्णानंद राय, बृजेश सिंह और अन्य के खिलाफ हत्या के प्रयास, बलवा समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया था। वहीं दूसरी ओर कृष्णानंद राय की तरफ से भी इसी घटना को लेकर अलग से एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
पुलिस जांच के बाद इस मामले में पांच आरोपियों जिसमे की बृजेश सिंह, त्रिभुवन सिंह, सुनील राय, आनंद राय और अजय सिंह उर्फ गुड्डू के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया। ट्रायल के दौरान कुल 11 गवाह पेश किए गए, जिनमें से सात गवाह अपने पूर्व बयान से मुकर गए, जबकि चार गवाहों की गवाही में भी विरोधाभास पाया गया।
बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं के अनुसार अदालत ने सभी साक्ष्यों, गवाहों के बयान और परिस्थितियों का परीक्षण करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। इसके आधार पर सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया।
गौरतलब है कि इस घटना के लगभग एक वर्ष बाद 2005 में भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जो प्रदेश की सबसे चर्चित आपराधिक घटनाओं में शामिल रही है। लंबे समय तक चले इस मामले में अदालत के फैसले के साथ ही एक पुराने और चर्चित आपराधिक प्रकरण का न्यायिक निष्कर्ष सामने आया है।
Explore Related Topics
टिप्पणियाँ
टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें