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IMF ने दी चेतावनी, बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम, सब्सिडी पर भी बड़ा बयान

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मिडिल ईस्ट तनाव के बीच IMF ने जताई चिंता, कहा- लंबे समय तक राहत देना अर्थव्यवस्था पर डाल सकता है दबाव।
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Bureau News Desk
06 May 2026
06:16 PM
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IMF ने दी चेतावनी, बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम, सब्सिडी पर भी बड़ा बयान
हाइलाइट्स
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मिडिल ईस्ट तनाव के बीच IMF ने जताई चिंता, कहा- लंबे समय तक राहत देना अर्थव्यवस्था पर डाल सकता है दबाव।

 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर बड़ा संकेत मिला है। आईएमएफ के एशिया पैसिफिक विभाग के निदेशक कृष्ण श्रीनिवासन ने कहा है कि यदि क्रूड ऑयल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं और उसका बोझ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचाया गया, तो इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

 

5 मई को एनसीएईआर के एक कार्यक्रम में बोलते हुए कृष्ण श्रीनिवासन ने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती लागत को लंबे समय तक सरकार या तेल कंपनियों द्वारा वहन करना बाजार संतुलन को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि वैश्विक हालात सामान्य नहीं हुए तो ईंधन की कीमतों में संशोधन करना पड़ सकता है।

 

उन्होंने यह भी कहा कि यदि उर्वरकों पर लागत कम की जाए या कुछ क्षेत्रों में राहत दी जाए, तो आम लोगों पर बढ़ती महंगाई का असर सीमित किया जा सकता है। आईएमएफ का यह बयान ऐसे समय आया है जब सरकार फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी से बचने की कोशिश कर रही है।

 

दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का असर वैश्विक कच्चे तेल की सप्लाई पर पड़ रहा है। मिडिल ईस्ट क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते तेल आपूर्ति बाधित हुई है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है। ब्रेंट क्रूड फिलहाल 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है, जबकि 30 अप्रैल तक भारत का क्रूड बास्केट करीब 118.70 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था।

 

विशेषज्ञों के अनुसार भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। ऐसे में वैश्विक कीमतों में तेजी का सीधा असर देश की ऊर्जा लागत और महंगाई पर पड़ता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा बना रहता है, तो परिवहन, उद्योग और घरेलू गैस जैसी आवश्यक सेवाओं की लागत भी बढ़ सकती है।

 

फरवरी 2026 से मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव का असर केवल पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहा है। कई राज्यों में कमर्शियल और घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा कुछ क्षेत्रों में सप्लाई प्रभावित होने से उपभोक्ताओं को दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा है।

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