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74वें जन्मदिवस पर लखनऊ में गूंजा “राजनाथ नाम का जयघोष”, शिवालयों में रुद्राभिषेक और मंदिरों में भजन

News Desk
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09 Jul 2025
11:22 PM
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74वें जन्मदिवस पर लखनऊ में गूंजा “राजनाथ नाम का जयघोष”, शिवालयों में रुद्राभिषेक और मंदिरों में भजन


>देश के रक्षामंत्री और लखनऊ से सांसद राजनाथ सिंह के 74वें जन्मदिवस पर राजधानी लखनऊ भक्ति, श्रद्धा और सेवा के रंगों से सराबोर हो गई। शिवालयों में रुद्राभिषेक, मंदिरों में सुंदरकांड पाठ, भजन-कीर्तन, भंडारे, वृक्षारोपण, और रक्तदान शिविरों से शहर ने अपने नेता को भावभीनी श्रद्धांजलि और शुभकामनाएं दीं।


>जन्मदिवस की पूर्व संध्या पर लखनऊ महानगर भाजपा की ओर से पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के मणि महेश्वर मंदिर में रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया, जहां पार्टी कार्यकर्ताओं ने मंत्रोच्चार के बीच जलाभिषेक कर राजनाथ सिंह की दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।


>महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी, अंजनी श्रीवास्तव और अन्य वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में रुद्राभिषेक संपन्न हुआ। भजन-कीर्तन, प्रसाद वितरण और सामूहिक प्रार्थना के जरिए कार्यकर्ताओं ने नेता के प्रति अपने स्नेह और आभार को व्यक्त किया।


>मीडिया प्रभारी प्रवीण गर्ग ने बताया कि 10 जुलाई को पूरे लखनऊ में विभिन्न आयोजन किए जा रहे हैं। हनुमान सेतु मंदिर में भव्य सुंदरकांड पाठ, गुरुद्वारों में पाठ, अखंड दीप प्रज्वलन, वृक्षारोपण अभियान, रक्तदान शिविर और सामूहिक भंडारे भी होंगे।


>राजनाथ सिंह को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, और देशभर के नेताओं ने जन्मदिन की बधाई दी। प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर उन्हें “देश की सेवा में एक विचारशील और समर्पित नेता” बताया।


>74 वर्ष की उम्र में भी राजनाथ सिंह राजनीति में संयम, संतुलन और स्वच्छ छवि के प्रतीक हैं। किसानों, व्यापारियों और आम नागरिकों से उनके गहरे जुड़ाव के साथ-साथ, विपक्षी नेताओं से भी उनके सौहार्दपूर्ण संबंध उनकी समावेशी राजनीति का उदाहरण हैं।


>10 जुलाई 1951 को वाराणसी के भाभोरा गांव में जन्मे राजनाथ सिंह का जीवन संघर्ष और सफलता की मिसाल है। भौतिक विज्ञान में B.Sc और M.Sc करने के बाद उन्होंने शिक्षक के रूप में कार्य किया, लेकिन राजनीति और जनसेवा के प्रति समर्पण उन्हें शिक्षक की कुर्सी से संसद की कुर्सी तक ले गया।


>1974 में राजनीति में प्रवेश करने के तीन साल बाद 1977 में वह विधानसभा सदस्य बने। 1991 में उत्तर प्रदेश के शिक्षा मंत्री बने और नैतिक शिक्षा व पाठ्यक्रम सुधार जैसे क्रांतिकारी निर्णय लिए। आज वे देश के रक्षामंत्री और भारतीय राजनीति के एक सुलझे हुए रणनीतिकार के रूप में प्रतिष्ठित हैं।

 

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