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अखिलेश यादव की चुनावी रणनीति: सिर्फ PDA नहीं, अब हर वर्ग को साधने की कोशिश

UP News: उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनावी संग्राम की आहट तेज हो गई है और साइकिल ने नए वादों के साथ रफ्तार पकड़ ली है, अखिलेश यादव इस बार सिर्फ पीडीए पर नहीं, बल्कि हर वर्ग को साधने की रणनीति के साथ मैदान में उतर चुके हैं।
News Desk
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18 Sep 2025
11:21 PM
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अखिलेश यादव की चुनावी रणनीति: सिर्फ PDA नहीं, अब हर वर्ग को साधने की कोशिश
हाइलाइट्स
UP News: उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनावी संग्राम की आहट तेज हो गई है और साइकिल ने नए वादों के साथ रफ्तार पकड़ ली है, अखिलेश यादव इस बार सिर्फ पीडीए पर नहीं, बल्कि हर वर्ग को साधने की रणनीति के साथ मैदान में उतर चुके हैं।


>2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने अपने पत्ते खोलने शुरू कर दिए हैं। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस बार सिर्फ पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक (PDA) वोट बैंक पर भरोसा न करते हुए महिलाओं, युवाओं, किसानों और शहरी मतदाताओं तक को साधने की नई रणनीति बनाई है। सपा ने शहरों के लिए अलग घोषणापत्र, छोटे दलों और जातीय समूहों को सम्मान देने के वादे, तथा रोजगार-आरक्षण जैसे मुद्दों को चुनावी एजेंडे में शामिल किया है।


>अखिलेश यादव का लक्ष्य 2012 जैसे ऐतिहासिक परिणाम दोहराने का है, लेकिन जनता का भरोसा जीतना बड़ी चुनौती होगी। भाजपा की लाभार्थी राजनीति को टक्कर देने के लिए सपा ने “स्त्री सम्मान-समृद्धि योजना” और जातीय प्रतीकों की राजनीति को धार देने वाले वादों की शुरुआत भी कर दी है।


>शहरों पर विशेष फोकस के तहत आगरा, मथुरा, नोएडा और गाजियाबाद जैसे जिलों के लिए अलग घोषणापत्र तैयार किया जा रहा है। वहीं, महाराजा सुहेलदेव, निषादराज, भगवान विश्वकर्मा, महाराणा प्रताप जैसी हस्तियों की प्रतिमाएं और नाविकों को नई नाव देने जैसे वादों के जरिए पार्टी जातीय समीकरण साधने में जुटी है।


>सपा अब छोटे दलों और उन समुदायों को भी साथ लाने की कोशिश कर रही है जो बीते चुनावों में भाजपा के पाले में चले गए थे। नौकरीपेशा वर्ग के लिए आउटसोर्सिंग खत्म कर पक्की नौकरी देने और पूरा आरक्षण लागू करने जैसे वादे भी युवाओं में उम्मीद जगा रहे हैं। हालांकि, चुनावी घोषणाओं की इस झड़ी के बीच सबसे अहम सवाल यही है कि क्या जनता इन वादों को भरोसेमंद मानेगी या फिर सपा को एक बार फिर “वादाखिलाफी” के आरोप झेलने पड़ेंगे।

 

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