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यूपी चुनाव से पहले ब्राह्मण वोटरों पर बढ़ा सपा का फोकस, 17 जून को लखनऊ में होगी अहम बैठक

विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी ब्राह्मण समाज के नेताओं के साथ रणनीति पर करेगी मंथन, संगठनात्मक मजबूती पर भी रहेगा जोर
Bureau
Bureau News Desk
16 Jun 2026
01:25 PM
1 min read
यूपी चुनाव से पहले ब्राह्मण वोटरों पर बढ़ा सपा का फोकस, 17 जून को लखनऊ में होगी अहम बैठक
हाइलाइट्स
विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी ब्राह्मण समाज के नेताओं के साथ रणनीति पर करेगी मंथन, संगठनात्मक मजबूती पर भी रहेगा जोर

 

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी कड़ी में पार्टी ने 17 जून को लखनऊ स्थित प्रदेश कार्यालय में ब्राह्मण समाज के नेताओं की बड़ी बैठक बुलाई है। इस बैठक में ब्राह्मण वोटरों के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करने और आगामी चुनाव को लेकर रणनीति तैयार करने पर चर्चा की जाएगी।

 

समाजवादी पार्टी की ओर से बुलाई गई इस बैठक को आगामी विधानसभा चुनाव के लिहाज से अहम माना जा रहा है। बैठक में ब्राह्मण समाज से जुड़े पार्टी के विधायक, पूर्व विधायक, सांसद और पूर्व सांसद शामिल होंगे। सूत्रों के अनुसार, बैठक में संगठन को मजबूत करने, समाज में भागीदारी बढ़ाने और विभिन्न कार्यक्रमों की रूपरेखा पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा ब्राह्मण समुदाय के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ाने के लिए भविष्य की रणनीति पर भी विचार किया जाएगा।

 

राजनीतिक हलकों में पिछले कुछ समय से ब्राह्मण समाज के एक वर्ग में भारतीय जनता पार्टी के प्रति नाराजगी की चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में समाजवादी पार्टी इस वर्ग के मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ाने के प्रयास में जुटी हुई है। माना जा रहा है कि पार्टी उन मतदाताओं को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर सकती है, जो मौजूदा समय में राजनीतिक विकल्प की तलाश में हैं। हालांकि इस संबंध में पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई बयान सामने नहीं आया है।

 

समाजवादी पार्टी ने वरिष्ठ समाजवादी नेता रहे जनेश्वर मिश्र की जयंती को भी इस बार विशेष रूप से मनाने का फैसला किया है। पार्टी इसके लिए व्यापक कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी में है। जनेश्वर मिश्र को समाजवादी विचारधारा का प्रमुख चेहरा माना जाता रहा है। उनके सम्मान में लखनऊ में जनेश्वर मिश्र पार्क का निर्माण भी कराया गया था। पार्टी की योजना है कि जयंती कार्यक्रमों के जरिए सामाजिक समावेश और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने का संदेश दिया जाए।

 

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पहले भी अपने पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को लेकर बयान दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि पीडीए में ऐसे अगड़े वर्ग के लोग भी शामिल हैं, जो खुद को उपेक्षित या पीड़ित महसूस करते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी का यह संदेश विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने की दिशा में एक प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।

 

उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण समुदाय को प्रभावशाली माना जाता है। राज्य में ब्राह्मण आबादी लगभग 15 प्रतिशत बताई जाती है। माना जाता है कि प्रदेश की करीब 115 विधानसभा सीटों पर इस समुदाय का सीधा प्रभाव है। इसके अलावा करीब 12 जिलों में ब्राह्मण मतदाताओं की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत से अधिक है। वहीं करीब 100 ऐसी सीटें भी हैं, जहां उनकी संख्या अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद जीत और हार के अंतर को प्रभावित करने की क्षमता रखती है।

 

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में ब्राह्मण मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग भारतीय जनता पार्टी के साथ माना गया था। हालांकि पिछले कुछ समय के दौरान विभिन्न मुद्दों को लेकर ब्राह्मण समाज के एक हिस्से में असंतोष की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं। ऐसे राजनीतिक माहौल में समाजवादी पार्टी इस वर्ग के बीच अपनी मौजूदगी मजबूत करने का प्रयास कर रही है। 17 जून को होने वाली बैठक को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

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