Sunday, 12 July 2026 | Lucknow | 29°C

योगी सरकार का संकल्प: 2027 तक उत्तर प्रदेश बनेगा बाल श्रम मुक्त राज्य

News Desk
News Desk News Desk
19 Jun 2025
07:42 AM
1 min read
योगी सरकार का संकल्प: 2027 तक उत्तर प्रदेश बनेगा बाल श्रम मुक्त राज्य


>उत्तर प्रदेश सरकार ने एक ऐतिहासिक और मानवीय संकल्प लेते हुए वर्ष 2027 तक प्रदेश को बाल श्रम मुक्त बनाने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बाल श्रम निषेध सप्ताह (12 से 17 जून 2025) का समापन इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, लखनऊ के मार्स ऑडिटोरियम में किया गया, जहां 1,000 से अधिक प्रतिभागियों की उपस्थिति में “बचपन बचाओ, भविष्य बनाओ” का संदेश गूंजा।


>इस समारोह में श्रम, शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, पंचायत, महिला कल्याण विभागों के साथ-साथ यूनिसेफ और अन्य गैर सरकारी संगठनों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में यह संकल्प लिया गया कि उत्तर प्रदेश को बाल अधिकारों और सुरक्षा के क्षेत्र में एक मिसाल राज्य बनाया जाएगा।


>मुख्य अतिथि श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि “मुख्यमंत्री योगी जी का स्पष्ट लक्ष्य है कि 2027 तक एक भी बच्चा मजदूरी करता न दिखे। यह चुनौतीपूर्ण जरूर है, पर सरकार की इच्छाशक्ति और समाज का सहयोग इसे संभव बनाएगा।” उन्होंने बताया कि विश्व में सबसे अधिक बाल श्रमिक अफ्रीका और फिर एशिया में हैं, जिसमें भारत और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। उन्होंने इसे सामाजिक कलंक बताते हुए इसके उन्मूलन की सामूहिक आवश्यकता पर बल दिया।

11,000 से अधिक बच्चों का पुनर्वास: ठोस परिणाम दे रहा है अभियान


>श्रम आयुक्त मार्कण्डेय शाही ने कहा कि पिछले वर्ष 11,000 से अधिक बाल श्रमिकों की पहचान कर उन्हें पुनर्वासित किया गया। “यह अभियान अब सिर्फ बचपन नहीं, पूरे समाज का भविष्य बचाने का आंदोलन बन गया है।” प्रमुख सचिव (श्रम) डॉ. एम.के. शनमुगा सुंदरम ने कहा कि बाल श्रम को केवल सामाजिक समस्या नहीं बल्कि वैश्विक संकट के रूप में देखा जाना चाहिए।

ILO और यूनिसेफ की रिपोर्ट ने दिखाई सच्चाई


>2024 में ILO और यूनिसेफ द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में 13.8 करोड़ बच्चे बाल श्रम में लगे हैं, जिनमें से 5.4 करोड़ खतरनाक कार्यों में शामिल हैं। भारत में लगभग 1 करोड़ बाल श्रमिक हैं, जिनमें से 2.5 लाख उत्तर प्रदेश में पाए गए। यह आंकड़े प्रदेश के लिए चेतावनी और संकल्प दोनों का आधार हैं।

डॉक्यूमेंट्री, पुस्तिका विमोचन और प्रेरक कहानियां


>कार्यक्रम में बाल श्रम उन्मूलन पर डॉक्यूमेंट्री, दो पोस्टर और एक पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। अटल आवासीय विद्यालय की महानिदेशक पूजा यादव ने संस्थान की प्रगति साझा की। वहीं, भिक्षावृत्ति से मुक्त कराई गई दो बालिकाएं पायल और माही मंच पर डॉक्टर बनने की इच्छा जाहिर कर सबकी आंखें नम कर गईं।

सम्मान और सामाजिक सहभागिता


>कार्यक्रम के अंतिम सत्र में 10 जनपदों — लखनऊ, कानपुर, गौतमबुद्ध नगर, मेरठ, आगरा, गाज़ियाबाद, मुज़फ्फरनगर, उन्नाव, जौनपुर और आज़मगढ़ को बाल श्रम के उन्मूलन में विशेष योगदान के लिए सम्मानित किया गया। ट्रेड यूनियन और एम्प्लॉयर एसोसिएशन ने भी बाल श्रम के खिलाफ साझा प्रतिबद्धता जताई।

 

टिप्पणियाँ

टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें

इस खबर को खबर पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद

ऐसी ही खबरों के लिए निचे स्क्रॉल करें

या होम पेज पर लेटेस्ट न्यूज़ पढ़ने के लिए क्लिक करें →

Related News