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देश में महिला बेरोजगारी दर बढ़ी, बेरोजगारी दर तीन महीने में सबसे ज्यादा

Business News: रोजगार के मोर्चे पर आई रिपोर्ट ने चौंका दिया है — महिलाओं की बेरोजगारी दर ने तीन महीने का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, क्या बढ़ते आंकड़े आत्मनिर्भर भारत के सपने को चुनौती दे रहे हैं?
News Desk
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16 Oct 2025
01:19 AM
1 min read
देश में महिला बेरोजगारी दर बढ़ी, बेरोजगारी दर तीन महीने में सबसे ज्यादा
हाइलाइट्स
Business News: रोजगार के मोर्चे पर आई रिपोर्ट ने चौंका दिया है — महिलाओं की बेरोजगारी दर ने तीन महीने का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, क्या बढ़ते आंकड़े आत्मनिर्भर भारत के सपने को चुनौती दे रहे हैं


>देश में रोजगार के मोर्चे पर चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। महिलाओं की बेरोजगारी दर सितंबर 2025 में तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। जबकि कुल बेरोजगारी दर में भी मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि जहां कुल बेरोजगारी दर अगस्त के 5.1% से बढ़कर 5.2% हो गई, वहीं महिलाओं की बेरोजगारी दर 9.3% पर पहुंच गई है जो पिछले तीन महीनों में सबसे अधिक है।


>महिलाओं की रोजगार स्थिति किसी भी समाज की प्रगति का दर्पण होती है। आत्मनिर्भर महिला न केवल परिवार को सशक्त बनाती है बल्कि आर्थिक विकास की धुरी भी बनती है। लेकिन जब यही महिलाएं रोजगार से वंचित होने लगें, तो सवाल उठना स्वाभाविक है आखिर देश में महिला रोजगार घट क्यों रहा है? PLFS के अनुसार, 15 साल और उससे अधिक आयु वर्ग की महिलाओं की बेरोजगारी दर सितंबर में तीन महीने के उच्च स्तर पर रही। यह न सिर्फ शहरों में बल्कि ग्रामीण भारत में भी चिंता का विषय बन गया है।

ग्रामीण भारत में बेरोजगारी दर अगस्त के 4.3% से बढ़कर सितंबर में 4.6% हो गई है, जो तीन महीने का हाई लेवल है।

  • ग्रामीण पुरुषों की बेरोजगारी दर: 4.5% → 4.7%

  • ग्रामीण महिलाओं की बेरोजगारी दर: 4% → 4.3%

वहीं, शहरी क्षेत्रों में स्थिति और गंभीर रही।

  • शहरी महिलाओं की बेरोजगारी दर अगस्त के 8.9% से बढ़कर सितंबर में 9.3% हो गई।

  • शहरी पुरुषों की बेरोजगारी दर भी 5.9% से बढ़कर 6% हो गई।

यानी, ग्रामीण और शहरी - दोनों ही इलाकों में रोजगार संकट महिलाओं पर ज्यादा भारी पड़ रहा है।

सकारात्मक पहलू यह है कि श्रम बल भागीदारी दर  में लगातार सुधार हो रहा है। PLFS के अनुसार,

  • कुल LFPR जून 2025 के 54.2% से बढ़कर सितंबर में 55.3% हो गया - यह पांच महीने का उच्च स्तर है।

  • ग्रामीण क्षेत्रों में LFPR जून के 56.1% से बढ़कर 57.4% हो गया।

  • शहरी क्षेत्रों में यह 50.9% पर स्थिर रहा।

  • वहीं, महिलाओं का LFPR सितंबर में 34.1% पर रहा - जो मई 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।

इससे संकेत मिलता है कि महिलाएं रोजगार की तलाश में अधिक सक्रिय हो रही हैं, लेकिन अवसरों की कमी अभी भी बड़ी बाधा बनी हुई है।

आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती महिला बेरोजगारी सरकार के लिए चेतावनी का संकेत है। एक ओर श्रम भागीदारी में सुधार हो रहा है, दूसरी ओर रोजगार सृजन की गति उतनी तेज नहीं है। अगर स्थिति पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो यह “India’s Growth Story” को प्रभावित कर सकती है।

 

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