अम्बेडकरनगर और गोरखपुर की विशेष अभियान समूह (एसओजी) टीमों के बीच एक व्यवसायी को पूछताछ के लिए लाने के दौरान हुए विवाद के बाद पुलिस अधीक्षक प्राची सिंह ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वाट टीम और सर्विलांस सेल से जुड़े चार पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से पुलिस लाइन भेज दिया गया है।
यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया जब गोरखपुर जिले के पिपराइच थाना क्षेत्र निवासी व्यवसायी श्रवण कुमार को अम्बेडकरनगर की एसओजी टीम एक मामले में पूछताछ के लिए लेकर आई थी। इसी बीच व्यवसायी के परिजनों ने उसके अपहरण की आशंका जताते हुए गोरखपुर पुलिस को सूचना दे दी।
परिजनों से सूचना मिलने के बाद गोरखपुर पुलिस और वहां की एसओजी टीम तत्काल सक्रिय हो गई। व्यवसायी की तलाश करते हुए पुलिस टीम अम्बेडकरनगर पहुंची, जहां अकबरपुर के पटेलनगर तिराहे पर दोनों जिलों की पुलिस टीमें आमने-सामने आ गईं।
बताया गया कि व्यवसायी को अपने साथ ले जाने को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले तीखी बहस हुई, जो कुछ समय के लिए हाथापाई तक पहुंच गई। सड़क पर दोनों टीमों के बीच हुए इस विवाद से मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई।
घटना की जानकारी मिलने पर गोरखपुर के पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ और अम्बेडकरनगर की पुलिस अधीक्षक प्राची सिंह ने तत्काल हस्तक्षेप किया। दोनों अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद स्थिति सामान्य हुई।
बाद में पूरे घटनाक्रम की जानकारी स्पष्ट होने पर व्यवसायी को गोरखपुर पुलिस अपने साथ ले गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार अम्बेडकरनगर पुलिस एक दर्ज मामले के सिलसिले में व्यवसायी से पूछताछ करना चाहती थी, जबकि गोरखपुर पुलिस अपहरण की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची थी। अधिकारियों ने प्रारंभिक तौर पर पूरे घटनाक्रम को गलतफहमी का परिणाम बताया है।
मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस अधीक्षक प्राची सिंह ने तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए स्वाट टीम प्रभारी उपनिरीक्षक अजीत कुमार पांडे, एसओजी के मुख्य आरक्षी महेश प्रताप सिंह, सर्विलांस सेल के मुख्य आरक्षी मनीष कुमार और मुख्य आरक्षी लल्लू यादव को तत्काल प्रभाव से पुलिस लाइन भेज दिया। हालांकि पुलिस की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि आगे विभागीय जांच कराई जाएगी या नहीं।
पुलिस विभाग में किसी पुलिसकर्मी को पुलिस लाइन भेजना एक प्रशासनिक कार्रवाई मानी जाती है। आमतौर पर ऐसी कार्रवाई तब की जाती है जब किसी घटना की निष्पक्ष समीक्षा या विभागीय जांच की आवश्यकता महसूस होती है। इसके बाद संबंधित कर्मियों की आगे की तैनाती या अन्य कार्रवाई विभागीय निर्णय के आधार पर तय की जाती है।
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