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CM फडणवीस के कजिन भाई आल्हाद कलोती बिना मुकाबला लड़े बने नगरसेवक

Maharashtra News: महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों में इस बार निर्विरोध जीत का नया ट्रेंड तेजी से उभर रहा है। इसी क्रम में चिखलदरा नगरपालिका से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कजिन भाई आल्हाद कलोती बिना मुकाबले विजयी घोषित हुए हैं।
News Desk
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20 Nov 2025
06:27 PM
1 min read
CM फडणवीस के कजिन भाई आल्हाद कलोती बिना मुकाबला लड़े बने नगरसेवक
हाइलाइट्स
Maharashtra News: महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों में इस बार निर्विरोध जीत का नया ट्रेंड तेजी से उभर रहा है। इसी क्रम में चिखलदरा नगरपालिका से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कजिन भाई आल्हाद कलोती बिना मुकाबले विजयी घोषित हुए हैं।


>महाराष्ट्र में स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के चुनाव इस बार कई नए राजनीतिक संकेत छोड़ रहे हैं। राज्य के विभिन्न जिलों में लगातार सामने आ रही निर्विरोध जीत ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। इसी कड़ी में अमरावती जिले की चिखलदरा नगरपालिका में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कजिन भाई आल्हाद कलोती बिना किसी प्रतिद्वंदी के विजयी घोषित हुए हैं। यह उनका पहला चुनाव था, जिसे उन्होंने बिना सीधी टक्कर के जीत लिया।


>चिखलदरा नगर परिषद के प्रभाग क्रमांक 10B से आल्हाद कलोती ने नामांकन भरा था। मुख्यमंत्री फडणवीस के ममेरे भाई माने जाने वाले आल्हाद के समर्थन में स्थानीय नेताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। नामांकन प्रक्रिया पूरी होते-होते उनके सामने खड़े प्रत्याशी ने अपना नाम वापस ले लिया, जिसके बाद आल्हाद कलोती को निर्विरोध विजयी घोषित कर दिया गया। स्थिति यह रही कि पहली बार मैदान में उतरे आल्हाद की उम्मीदवारी ही चुनाव का प्रमुख केंद्र बन गई थी।


>इस चुनाव में विधायक रवी राणा की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि उनकी पहल के बाद विपक्षी उम्मीदवारों ने अपना नामांकन वापस ले लिया। निर्वाचन प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत बाद रवी राणा ने मुख्यमंत्री फडणवीस को फोन कर परिणाम की जानकारी भी दी। चिखलदरा ही नहीं, हाल के दिनों में महाराष्ट्र के कई नगर निकायों में निर्विरोध चुनावों की संख्या बढ़ती दिख रही है सोलापुर के अनगर नगर पंचायत में 17 नगरसेवक और नगराध्यक्ष प्राजक्त पाटील निर्विरोध चुने गए। दोंडाई नगर परिषद में भाजपा नेता और मंत्री जयकुमार रावल की माता नगराध्यक्ष बनीं, यहां 7 नगरसेवक भी निर्विरोध विजयी हुए। कई क्षेत्रों में निर्विरोध प्रक्रिया के पीछे संगठनात्मक रणनीति और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को वजह माना जा रहा है।

 

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