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महाराष्ट्र निकाय चुनाव में कांग्रेस का अकेले लड़ने का ऐलान, एमवीए में बढ़ी राजनीतिक खींचतान

Maharashtra News: महाराष्ट्र में आगामी निकाय चुनावों से पहले कांग्रेस ने बीएमसी सहित सभी नगर निकायों में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। इस निर्णय के बाद महा विकास आघाड़ी (एमवीए) में सहयोगी दलों के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं, खासकर शिवसेना (यूबीटी) ने कांग्रेस से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है।
News Desk
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23 Nov 2025
10:04 PM
1 min read
महाराष्ट्र निकाय चुनाव में कांग्रेस का अकेले लड़ने का ऐलान, एमवीए में बढ़ी राजनीतिक खींचतान
हाइलाइट्स
Maharashtra News: महाराष्ट्र में आगामी निकाय चुनावों से पहले कांग्रेस ने बीएमसी सहित सभी नगर निकायों में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। इस निर्णय के बाद महा विकास आघाड़ी (एमवीए) में सहयोगी दलों के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं, खासकर शिवसेना (यूबीटी) ने कांग्रेस से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है।


>महाराष्ट्र में होने वाले आगामी निकाय चुनावों से पहले महा विकास आघाड़ी (एमवीए) के भीतर मतभेद साफ दिखने लगे हैं। कांग्रेस ने ऐलान किया है कि वह बीएमसी सहित सभी स्थानीय निकाय चुनाव अकेले लड़ेगी, जिसके बाद शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस के रिश्तों में खिंचाव बढ़ गया है। शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) ने कांग्रेस से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील भी की है।


>कांग्रेस के इस निर्णय के बाद पार्टी के भीतर भी दो अलग-अलग विचार सामने आए हैं। एक वर्ग का मानना है कि कुछ स्थानीय निकायों में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के साथ तालमेल फायदेमंद हो सकता है, जबकि दूसरा वर्ग किसी भी तरह के सहयोग का विरोध कर रहा है। मुंबई कांग्रेस की अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ेगी और इस फैसले में बदलाव की संभावना नहीं है।


>एमवीए के तीसरे घटक, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) ने एमएनएस को साथ लेकर चुनाव लड़ने का समर्थन किया है। शरद पवार से कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर सीटों पर चर्चा भी की। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार शिवसेना (यूबीटी) का मानना है कि पवार कांग्रेस को एमएनएस पर अपना रुख नरम करने के लिए मना सकते हैं, ताकि भाजपा के खिलाफ विपक्ष एकजुट हो सके।


>कांग्रेस के एक वर्ग का तर्क है कि एमएनएस की धरती-पुत्र राजनीति और उत्तर भारतीयों के खिलाफ पिछले रुख को देखते हुए गठबंधन पार्टी की परंपरागत वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है। दूसरी ओर एक अन्य वर्ग का मानना है कि जहां कांग्रेस कमजोर है, वहां एमएनएस और शिवसेना (यूबीटी) के साथ मिलकर लड़ने से भाजपा को चुनौती देना आसान हो सकता है।


>कुछ कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राज ठाकरे की बदलती राजनीतिक स्थिति पर भरोसा करना मुश्किल है। उनका कहना है कि कांग्रेस ने शिवसेना (यूबीटी) के साथ न्यूनतम साझा कार्यक्रम के आधार पर हाथ मिलाया था और हिंदुत्व एजेंडा पर सहमति नहीं बनी थी। वे मानते हैं कि शिवसेना (यूबीटी) मुंबई की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है, इसलिए एमएनएस के साथ उसके बढ़ते तालमेल को राजनीतिक रूप से समझा जाना चाहिए।


>कांग्रेस के कुछ नेता, विशेषकर कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वड्डेटीवार, मानते हैं कि भाजपा को मजबूत चुनौती देने के लिए एमएनएस सहित सभी विपक्षी दलों को एक साथ चुनाव लड़ना चाहिए।


>राज्य में 246 नगर परिषदों और 42 नगर पंचायतों के चुनाव 2 दिसंबर को होंगे। वहीं मुंबई सहित महानगरपालिकाओं के चुनाव जनवरी 2026 में होने की संभावना है।

 

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