राजधानी लखनऊ में नारी शक्ति वंदन विधेयक को लेकर आयोजित महिला पदयात्रा ने प्रदेश की राजनीति को नया मोड़ दे दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में निकली इस पदयात्रा में हजारों महिलाओं की भागीदारी ने इसे एक बड़े राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में स्थापित किया। मुख्यमंत्री आवास 5 कालीदास मार्ग से विधानसभा तक निकले इस मार्च में महिलाओं ने विपक्ष के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया और आगामी चुनावों को लेकर स्पष्ट संदेश दिया।
पदयात्रा में प्रदेश सरकार की कई महिला मंत्री, जनप्रतिनिधि और संगठन से जुड़ी कार्यकर्ता शामिल हुईं। प्रतिभागियों ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर महिला विरोधी रुख अपनाने का आरोप लगाया। कार्यक्रम के दौरान मंच से दिए गए संबोधनों में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर राजनीतिक बहस को प्रमुखता से उठाया गया।
शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने कहा कि महिलाओं को पंचायत से लेकर विधानसभा और लोकसभा तक अपनी भागीदारी को मजबूत करना होगा। उन्होंने आगामी 2027 के विधानसभा और 2029 के लोकसभा चुनावों में महिलाओं की निर्णायक भूमिका की बात कही और इसे राजनीतिक दिशा तय करने वाला बताया।
महिला कल्याण मंत्री बेबी रानी मौर्य ने संसद में विधेयक से जुड़े घटनाक्रम का जिक्र करते हुए विपक्षी दलों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को महिलाओं के सम्मान से जोड़कर देखा जाना चाहिए और इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
इस पदयात्रा में पूर्व सांसद रीता बहुगुणा जोशी सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण को लेकर केंद्र सरकार की पहल को व्यापक समर्थन मिल रहा है। कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक समेत कई मंत्री, विधायक और महिला संगठन की पदाधिकारी मौजूद रहीं। लखनऊ में आयोजित इस पदयात्रा को महिला मतदाताओं को केंद्र में रखकर बनाई जा रही राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी ने यह संकेत दिया कि आने वाले चुनावों में महिला मुद्दे प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं।
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