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बच्चों को बचाने के लिए आग में कूदी मां, इलाज के दौरान हुई मौत

नैनी बाजार में शॉर्ट सर्किट से लगी भीषण आग, बच्चों और परिवार को बचाते समय गंभीर रूप से झुलसी महिला ने अस्पताल में तोड़ा दम।
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Bureau News Desk
16 May 2026
09:23 PM
1 min read
बच्चों को बचाने के लिए आग में कूदी मां, इलाज के दौरान हुई मौत
हाइलाइट्स
नैनी बाजार में शॉर्ट सर्किट से लगी भीषण आग, बच्चों और परिवार को बचाते समय गंभीर रूप से झुलसी महिला ने अस्पताल में तोड़ा दम।

 

प्रयागराज के नैनी बाजार क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। आग की चपेट में आए मकान में फंसे बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों को बचाने के लिए एक मां ने अपनी जान की परवाह किए बिना साहसिक कदम उठाया, लेकिन गंभीर रूप से झुलसने के बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।

 

जानकारी के अनुसार, नैनी बाजार की चैंपियन गली में रहने वाले तीन भाइयों का संयुक्त परिवार एक बहुमंजिला मकान में रहता था। मकान के भूतल पर क्रॉकरी की दुकान और गोदाम संचालित था, जबकि ऊपरी मंजिलों पर परिवार के सदस्य रहते थे। मंगलवार रात करीब नौ बजे अचानक गोदाम में शॉर्ट सर्किट होने से आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और कुछ ही देर में पूरा भवन धुएं और लपटों से घिर गया।

 

आग नीचे के हिस्से में फैलने के कारण परिवार के लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया। धुएं के कारण सांस लेना भी कठिन हो रहा था। स्थिति बिगड़ती देख सभी लोग किसी तरह छत पर पहुंच गए। संकरी गली होने के चलते दमकल वाहनों को मौके तक पहुंचने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

 

इसी बीच संजीव केसरीवानी की पत्नी अर्चना ने असाधारण साहस का परिचय दिया। सामने स्थित पड़ोसी की छत तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता होने के कारण अर्चना ने सबसे पहले अपने एक वर्षीय बच्चे को चादर में लपेटकर लगभग बारह फीट दूर पड़ोसी की छत की ओर फेंका। वहां मौजूद लोगों ने बच्चे को सुरक्षित पकड़ लिया।

 

इसके बाद अर्चना ने सीढ़ी की मदद से अपनी 13 वर्षीय और 10 वर्षीय दोनों बेटियों को भी सुरक्षित पड़ोसी की छत तक पहुंचाया। उसने अपने भतीजे को भी बाहर निकालने में सफलता हासिल की। परिवार के अन्य सदस्यों को सुरक्षित करने के दौरान अर्चना खुद आग और धुएं की चपेट में आ गई और गंभीर रूप से झुलस गई।

 

घटना के बाद अर्चना को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। हादसे में उसकी 13 वर्षीय बेटी भी झुलस गई, जिसका उपचार गहन चिकित्सा कक्ष में चल रहा है। वहीं, छत से नीचे उतरने के प्रयास में अर्चना की भाभी सरिता के पैर में फ्रैक्चर हो गया।

 

आग इतनी भयावह थी कि उस पर काबू पाने के लिए दमकल विभाग की करीब 12 गाड़ियों को लगाया गया। कई घंटे की मशक्कत के बाद देर रात लगभग चार बजे आग पर पूरी तरह नियंत्रण पाया जा सका। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य का जायजा लिया।

 

घटना के बाद इलाके में लोगों की भारी भीड़ जुट गई। स्थानीय लोग अर्चना के साहस और त्याग की चर्चा करते नजर आए। बच्चों और परिवार को बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाली अर्चना की कहानी ने पूरे शहर को भावुक कर दिया है। 

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