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शुभेंदु अधिकारी बने पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री, जाने पूरा राजनीतिक सफर

नंदीग्राम आंदोलन से उभरे नेता ने ममता बनर्जी को दो बार दी चुनौती, अब बीजेपी ने सौंपी बंगाल की कमान।
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Bureau News Desk
08 May 2026
07:20 PM
1 min read
शुभेंदु अधिकारी बने पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री, जाने पूरा राजनीतिक सफर
हाइलाइट्स
नंदीग्राम आंदोलन से उभरे नेता ने ममता बनर्जी को दो बार दी चुनौती, अब बीजेपी ने सौंपी बंगाल की कमान।

 

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। भाजपा ने वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता चुनते हुए राज्य का नया मुख्यमंत्री घोषित किया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आज इस फैसले का औपचारिक ऐलान किया। 2021 में नंदीग्राम और 2026 में भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी को मिली राजनीतिक चुनौती के बाद शुभेंदु अधिकारी पार्टी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाने लगे थे।

 

पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के साथ ही राज्य की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है। लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस और उससे पहले कांग्रेस से जुड़े रहे शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर लगातार उतार-चढ़ाव और बड़े घटनाक्रमों से जुड़ा रहा है।

 

शुभेंदु अधिकारी का नाम सबसे पहले राज्य स्तर पर उस समय प्रमुखता से सामने आया, जब वर्ष 2007-08 में पूर्व मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम क्षेत्र में प्रस्तावित विशेष आर्थिक क्षेत्र यानी एसईजेड परियोजना के खिलाफ आंदोलन शुरू हुआ। इंडोनेशिया के सलीम ग्रुप की परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध करते हुए बीयूपीसी का नेतृत्व शुभेंदु अधिकारी ने संभाला। आंदोलन के दौरान 14 मार्च 2007 को पुलिस फायरिंग में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई थी। यह घटना पश्चिम बंगाल की राजनीति का अहम मोड़ मानी गई और बाद के वर्षों में 34 साल पुराने वाम शासन के अंत का रास्ता तैयार हुआ।

 

राजनीतिक करियर की शुरुआत उन्होंने कांग्रेस से की थी। बाद में वह 1998 में ममता बनर्जी द्वारा बनाई गई तृणमूल कांग्रेस से जुड़े और करीब दो दशक तक पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे। तृणमूल कांग्रेस सरकार में उन्होंने परिवहन और सिंचाई मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इसके अलावा वह वर्ष 2009 से 2014 तक तमलुक लोकसभा सीट से सांसद भी रहे।

 

दिसंबर 2020 में शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था। इसके बाद बंगाल विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम सीट से ममता बनर्जी को कड़ी टक्कर दी और राजनीतिक रूप से भाजपा के बड़े चेहरे बनकर उभरे। वर्ष 2026 के राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद पार्टी नेतृत्व ने उन्हें राज्य की कमान सौंपने का फैसला किया।

 

शुभेंदु अधिकारी एक राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद रह चुके हैं। उनके भाई दिव्येंदु अधिकारी और सौमेंदु अधिकारी भी पश्चिम बंगाल की राजनीति में सक्रिय हैं और भाजपा से जुड़े हुए हैं। निजी जीवन की बात करें तो शुभेंदु अधिकारी ने विवाह नहीं किया है।

 

शिक्षा की बात करें तो उन्होंने पूर्व मेदिनीपुर के कोंताई हाई स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद विद्यासागर विश्वविद्यालय से संबद्ध प्रभात कुमार कॉलेज से बीए की डिग्री हासिल की। वर्ष 2011 में उन्होंने रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से एमए किया। इसके अलावा नेता सुभाष मुक्त विश्वविद्यालय से भी उन्होंने अध्ययन किया है।

 

वर्ष 2026 में दाखिल चुनावी हलफनामे के अनुसार शुभेंदु अधिकारी के पास करीब 85.87 लाख रुपये की संपत्ति है। इसमें पुश्तैनी जमीन, आवासीय संपत्ति, बैंक जमा, केवीपी और एनएससी शामिल हैं। उनकी वार्षिक आय लगभग 17.38 लाख रुपये बताई गई है। हलफनामे के अनुसार उन पर किसी प्रकार का कर्ज दर्ज नहीं है।

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