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यूपी में 1,725 करोड़ की रोजगार योजना मंजूर, पांच शहरों में पहले खुलेंगे केंद्र

योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद ने योजना को मंजूरी दी; सभी 75 जिलों को नौ जोन में जोड़कर प्रशिक्षण और रोजगार का एकीकृत तंत्र विकसित किया जाएगा।
Bureau
Bureau News Desk
09 Oct 2026
05:53 PM
1 min read
यूपी में 1,725 करोड़ की रोजगार योजना मंजूर, पांच शहरों में पहले खुलेंगे केंद्र
हाइलाइट्स
उत्तर प्रदेश मंत्रिपरिषद ने सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र विकास योजना को मंजूरी दी।
प्रदेश के सभी 75 जिलों को नौ जोन में जोड़कर कौशल प्रशिक्षण और रोजगार का एकीकृत तंत्र विकसित किया जाएगा।
पहले चरण में लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, गौतमबुद्ध नगर और झांसी में केंद्र स्थापित होंगे।
प्रत्येक केंद्र के लिए 10 से 25 एकड़ भूमि और राजमार्ग या एक्सप्रेसवे से चार लेन सड़क संपर्क की व्यवस्था का प्रावधान है।

उत्तर प्रदेश में युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने और उन्हें रोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए नई व्यवस्था विकसित करने की तैयारी है। राज्य सरकार ने इसके लिए एक ऐसी योजना को मंजूरी दी है, जिसमें प्रशिक्षण, उद्योगों की जरूरत और रोजगार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया है। योजना के तहत प्रदेश के सभी जिलों को एकीकृत व्यवस्था से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र विकास योजना को मंजूरी प्रदान की गई। इस योजना का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है।

सरकार ने इसके लिए ‘अल्टीमेट सोर्सिंग हब ऑफ स्किल्ड मैनपावर’ और ‘ग्लोबल मैनपावर हब’ के रूप में उत्तर प्रदेश को विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। योजना के अंतर्गत प्रदेश के सभी 75 जिलों को शामिल करते हुए नौ जोन में कौशल प्रशिक्षण और रोजगार का एकीकृत तंत्र विकसित किया जाएगा। इस व्यवस्था में युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित करने और उन्हें देश तथा विदेश में उपलब्ध रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर ध्यान दिया जाएगा। प्रशिक्षण की व्यवस्था स्थानीय औद्योगिक गतिविधियों, बाजार की मांग और संबंधित क्षेत्रों में उपलब्ध रोजगार की संभावनाओं के अनुरूप विकसित की जाएगी।

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योजना के पहले चरण में पांच प्रमुख स्थानों पर कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण और सेवायोजन की व्यवस्था विकसित की जाएगी। प्रस्तावित केंद्रों का विवरण इस प्रकार है:

  • लखनऊ: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग की ओर से केंद्र स्थापित किया जाएगा।

  • कानपुर: सार्वजनिक-निजी सहभागिता यानी पीपीपी मॉडल के तहत केंद्र विकसित होगा।

  • गोरखपुर: गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) की ओर से केंद्र स्थापित किया जाएगा।

  • गौतमबुद्ध नगर: नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के संयुक्त सहयोग से केंद्र बनाया जाएगा।

  • झांसी: बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) की ओर से केंद्र स्थापित किया जाएगा।

इन पांच स्थानों पर केंद्रों की स्थापना के बाद योजना के व्यापक ढांचे के तहत प्रदेश के सभी जिलों को नौ जोन में जोड़ने की व्यवस्था की जाएगी। प्रत्येक जोन में प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़ी गतिविधियों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप संचालित करने की योजना है। योजना के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों को नौ जोन में शामिल किया जाएगा। प्रत्येक जोन में संबंधित औद्योगिक क्षेत्रों, बाजार की जरूरतों और रोजगार की संभावनाओं का आकलन कर प्रशिक्षण व्यवस्था विकसित की जाएगी। प्रस्तावित नौ जोन का विवरण इस प्रकार है:

जोन-1: गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद और हापुड़।

जोन-2: सहारनपुर मंडल तथा बुलंदशहर, बागपत और मेरठ।

जोन-3: मुरादाबाद और बरेली मंडल।

जोन-4: आगरा और अलीगढ़ मंडल।

जोन-5: लखनऊ और अयोध्या मंडल।

जोन-6: कानपुर और प्रयागराज मंडल।

जोन-7: चित्रकूट, विंध्याचल और झांसी मंडल।

जोन-8: वाराणसी और आजमगढ़ मंडल।

जोन-9: गोरखपुर, बस्ती और देवीपाटन मंडल।

इस जोन आधारित व्यवस्था का उद्देश्य प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़ी गतिविधियों को अलग-अलग क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुसार व्यवस्थित करना है। इसके तहत उद्योगों, बाजार क्षेत्रों और सरकारी विभागों की मानव संसाधन संबंधी जरूरतों का आकलन किया जाएगा, ताकि प्रशिक्षण कार्यक्रमों को रोजगार की मांग के अनुरूप तैयार किया जा सके।

 

योजना में कौशल विकास और रोजगार व्यवस्था के लिए हब एवं स्पोक मॉडल अपनाने का प्रावधान किया गया है। इस मॉडल के तहत प्रमुख केंद्रों को प्रशिक्षण एवं रोजगार संबंधी गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा और व्यापक जोन आधारित नेटवर्क के माध्यम से जिलों को जोड़ा जाएगा। प्रत्येक जोन में स्थानीय उद्योगों और बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखकर प्रशिक्षण की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य युवाओं को ऐसे कौशल उपलब्ध कराना है, जिनकी संबंधित क्षेत्रों में मांग हो। इस व्यवस्था में विभिन्न उद्योगों, बाजार क्षेत्रों और विभागों की मानव संसाधन आवश्यकताओं का आकलन भी किया जाएगा। इसके आधार पर प्रशिक्षण की जरूरतों और रोजगार के अवसरों के बीच समन्वय स्थापित करने की योजना है।

योजना के अंतर्गत प्रत्येक कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र की स्थापना के लिए 10 से 25 एकड़ तक उपयुक्त और भारमुक्त भूमि की व्यवस्था की जाएगी। केंद्रों तक आवागमन आसान बनाने के लिए निकटवर्ती राजमार्ग या एक्सप्रेसवे से चार लेन की सड़क संपर्क सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान भी किया गया है। इसके लिए दो वर्ष की समयसीमा निर्धारित की गई है।

केंद्रों का विकास और संचालन सार्वजनिक-निजी सहभागिता आधारित डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन एवं हस्तांतरण यानी डीबीएफओटी मॉडल अथवा सरकारी संस्थाओं के माध्यम से किया जा सकेगा। इस व्यवस्था के तहत केंद्रों के निर्माण, वित्तपोषण और संचालन के लिए निर्धारित मॉडल के अनुसार कार्य किया जाएगा। योजना में निजी विकासकर्ताओं और प्रशिक्षण प्रदाताओं की भागीदारी का भी प्रावधान रखा गया है।

योजना के तहत अलग-अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले युवाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। इसमें मानविकी और वाणिज्य जैसे गैर-तकनीकी विषयों से पढ़ाई करने वाले युवाओं को आधारभूत कौशल प्रशिक्षण देने का प्रावधान है। वहीं, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई), पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग की पृष्ठभूमि वाले युवाओं के लिए तकनीकी कौशल उन्नयन की व्यवस्था की जाएगी। प्रशिक्षण कार्यक्रमों को रोजगार की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया गया है। इसके अलावा देश के दूसरे राज्यों और विदेशों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों को ध्यान में रखते हुए भारतीय तथा विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

भाषा प्रशिक्षण की व्यवस्था आवश्यकता के आधार पर विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य उन रोजगार अवसरों के अनुरूप युवाओं को तैयार करना है, जिनके लिए संबंधित भाषा का ज्ञान जरूरी हो सकता है। हालांकि, उपलब्ध योजना विवरण में प्रशिक्षण के लिए निर्धारित पाठ्यक्रमों, प्रत्येक केंद्र की सीटों की संख्या, प्रवेश प्रक्रिया और प्रशिक्षण की अवधि का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है।

योजना के तहत प्रशिक्षणार्थियों के लिए छात्रावास की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसके साथ ही केंद्र परिसर में सेवायोजन कार्यालय और प्लेसमेंट सेल भी स्थापित किए जाएंगे। इन व्यवस्थाओं के माध्यम से प्रशिक्षण और रोजगार संबंधी गतिविधियों को एक ही परिसर से जोड़ने की योजना है। प्रशिक्षण पूरा करने वाले युवाओं को रोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए देश और विदेश में नियोजन के क्षेत्र में काम करने वाली मान्यता प्राप्त प्रतिष्ठित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा।

इस व्यवस्था में प्रशिक्षण देने के साथ-साथ रोजगार से संबंधित गतिविधियों को भी महत्व दिया गया है। योजना का घोषित उद्देश्य युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुसार प्रशिक्षित कर उन्हें उपलब्ध रोजगार अवसरों से जोड़ना है। हालांकि, योजना के विवरण में रोजगार की गारंटी, न्यूनतम वेतन, कुल प्रस्तावित नौकरियों या प्रत्येक वर्ष प्रशिक्षित किए जाने वाले युवाओं की संख्या का उल्लेख नहीं किया गया है।

सरकार की योजना के तहत आगामी तीन वर्षों में कुल 1,725 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस राशि का उपयोग योजना से संबंधित परियोजनाओं, प्रशिक्षण केंद्रों और अन्य निर्धारित गतिविधियों के लिए किया जाना है। योजना में निजी विकासकर्ताओं और प्रशिक्षण प्रदाताओं को जरूरत के अनुसार वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) उपलब्ध कराने का प्रावधान भी है। इसके माध्यम से निर्धारित शर्तों के अनुसार परियोजनाओं के वित्तीय पक्ष में सहायता दी जा सकेगी। हालांकि, उपलब्ध विवरण में कुल बजट का केंद्रवार या वर्षवार विस्तृत विभाजन नहीं दिया गया है। इसलिए प्रत्येक केंद्र पर होने वाले खर्च और अलग-अलग प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए निर्धारित राशि का आकलन इस जानकारी के आधार पर नहीं किया जा सकता।

योजना के पारदर्शी और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य, जिला और परियोजना स्तर पर समन्वय तथा निगरानी की व्यवस्था की जाएगी। इसके अंतर्गत परियोजनाओं की स्थापना, संचालन, वित्तीय प्रबंधन, प्रशिक्षण की गुणवत्ता और रोजगार से संबंधित गतिविधियों की निगरानी की जाएगी। उद्योगों, संबंधित सरकारी विभागों और औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के बीच समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया है।

इसके अलावा कौशल प्रशिक्षण एवं सेवायोजन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल डैशबोर्ड, डेटा विश्लेषण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित तकनीकी सुविधाओं के इस्तेमाल का प्रावधान किया गया है। इन सुविधाओं के लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकी भागीदार का चयन किया जाएगा। योजना में डिजिटल माध्यमों के जरिए प्रशिक्षण और रोजगार संबंधी गतिविधियों की निगरानी तथा समन्वय को अधिक प्रभावी बनाने की व्यवस्था शामिल है।

योजना के विवरण में उत्तर प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र के महत्व का भी उल्लेख किया गया है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में लगभग 96 लाख एमएसएमई उद्यम हैं। यह संख्या देश के कुल लगभग 6.77 करोड़ उद्यमों का करीब 14.2 प्रतिशत है। राज्य के औद्योगिक उत्पादन में एमएसएमई क्षेत्र का योगदान लगभग 60 प्रतिशत और निर्यात में करीब 45 प्रतिशत बताया गया है। इस क्षेत्र में तीन करोड़ से अधिक लोग कार्यरत हैं।

योजना में उद्योगों की बढ़ती मांग के अनुरूप कुशल कार्यबल की उपलब्धता सुनिश्चित करने और युवाओं को रोजगार से जोड़ने को प्रमुख उद्देश्य के रूप में रखा गया है। इसी संदर्भ में प्रशिक्षण व्यवस्था को औद्योगिक जरूरतों और बाजार की मांग के अनुरूप विकसित करने का प्रावधान किया गया है। इस योजना के तहत पहले चरण में पांच स्थानों पर केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जबकि व्यापक ढांचे में प्रदेश के सभी 75 जिलों को नौ जोन से जोड़ने का लक्ष्य है। परियोजना की अनुमानित अवधि तीन वर्ष है और इसके लिए 1,725 करोड़ रुपये के व्यय का अनुमान रखा गया है।

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