Ambedkar Nagar News: उत्तर प्रदेश राइस मिलर्स एसोसिएशन ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की धान खरीद नीति को लेकर असंतोष जताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से नीति में संशोधन की मांग की है। एसोसिएशन ने जिलाधिकारी ईशा प्रिया के माध्यम से मुख्यमंत्री को मांग पत्र भेजकर प्रोत्साहन राशि बहाल करने, चावल की रिकवरी में छूट बढ़ाने और बकाया भुगतान तत्काल कराने सहित कई मांगें उठाई हैं। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि मांगों पर विचार नहीं किए जाने की स्थिति में प्रदेश के राइस मिलर्स को सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) का कार्य करने के लिए बाध्य न किया जाए और इसे ऐच्छिक कर दिया जाए।
एसोसिएशन के अध्यक्ष राम अजोर वर्मा, महामंत्री रजनीश सिंह और कोषाध्यक्ष सुजीत जायसवाल की ओर से भेजे गए मांग पत्र में कहा गया है कि धान खरीद नीति तैयार करते समय एसोसिएशन के साथ हुई चर्चाओं और दिए गए सुझावों को नजरअंदाज किया गया है। एसोसिएशन ने राइस मिलर्स को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि समाप्त किए जाने तथा सीएमआर के बदले भुगतान के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिए जाने पर भी नाराजगी जताई है।
एसोसिएशन ने मांग की है कि राइस मिलर्स को पूर्व की भांति प्रोत्साहन राशि दी जाए। मांग पत्र में कहा गया है कि सरकार की ओर से एसोसिएशन को आश्वासन दिया गया था कि प्रत्येक वर्ष प्रोत्साहन राशि में कुछ न कुछ वृद्धि की जाएगी, लेकिन इसके विपरीत वर्तमान धान खरीद नीति में प्रोत्साहन राशि समाप्त कर दी गई। एसोसिएशन का कहना है कि इससे प्रदेश के चावल उद्योग के सामने आर्थिक संकट गहराने की आशंका है। एसोसिएशन ने खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 की पूरी प्रोत्साहन राशि भी राइस मिलर्स को दिलाने की मांग की है। उसका आरोप है कि पिछले वर्ष सीएमआर का समय से सम्प्रदान नहीं हो पाने के कारण मिलर्स की प्रोत्साहन राशि काट ली गई और उन्हें होल्डिंग चार्ज भी वहन करना पड़ा, जबकि इसके लिए जिम्मेदार परिस्थितियां सरकारी क्रय व्यवस्था से जुड़ी थीं।
एसोसिएशन ने हाईब्रिड धान की मिलिंग में होने वाले नुकसान का मुद्दा उठाते हुए रिकवरी में दी जा रही छूट को 1.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 2 प्रतिशत करने की मांग की है। मांग पत्र के अनुसार, भारतीय खाद्य निगम के मानकों के अनुरूप हाईब्रिड धान से चावल की रिकवरी लगभग 48 से 50 किलोग्राम प्रति क्विंटल रह जाती है, जबकि निर्धारित मात्रा 67 किलोग्राम तक होती है। एसोसिएशन का कहना है कि निर्धारित मात्रा और वास्तविक रिकवरी के बीच अंतर की भरपाई राइस मिलर्स को अपनी ओर से करनी पड़ती है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
एसोसिएशन ने कहा है कि रिकवरी में छूट बढ़ाने से मिलर्स पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही, उद्योग को बचाए रखने के लिए धान खरीद नीति में व्यावहारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है। मांग पत्र में पिछले वर्ष सीएमआर के समय से सम्प्रदान में आई बाधाओं का भी उल्लेख किया गया है। एसोसिएशन के अनुसार, फोर्टिफाइड राइस कर्नेल के सीमित सप्लायर, बरदाना उपलब्ध नहीं होने और भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में पर्याप्त जगह का अभाव रहने के कारण चावल जमा करने में देरी हुई। एसोसिएशन का कहना है कि इन व्यवस्थागत समस्याओं के लिए राइस मिलर्स को जिम्मेदार ठहराते हुए उनकी प्रोत्साहन राशि काटी गई और होल्डिंग चार्ज का बोझ भी उन पर डाल दिया गया। एसोसिएशन ने मांग की है कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नीति बनाई जाए, ताकि सरकारी व्यवस्था से जुड़ी बाधाओं का आर्थिक दंड राइस मिलर्स को न भुगतना पड़े।
एसोसिएशन ने सरकारी क्रय एजेंसियों पर लंबित राइस मिलर्स के बकाया भुगतान तत्काल जारी करने की मांग की है। मांग पत्र में कहा गया है कि यदि एसोसिएशन के सुझावों को स्वीकार नहीं किया जाता है तो राइस मिलर्स को सीएमआर का कार्य करने के लिए बाध्य न किया जाए, बल्कि इसे ऐच्छिक कर दिया जाए। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि प्रोत्साहन राशि की बहाली, रिकवरी छूट में वृद्धि, लंबित भुगतान का निस्तारण और पिछले वर्ष की समस्याओं का समाधान करते हुए धान खरीद नीति में आवश्यक संशोधन किया जाए।
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