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UP में चकबंदी व्यवस्था को मिली रफ्तार, 8 साल में 21 लाख से अधिक वादों का निस्तारण

UP News: उत्तर प्रदेश में चकबंदी व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने पर जोर दिया गया है। चकबंदी निदेशालय के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2017 की तुलना में वर्ष 2025 तक चकबंदी प्रक्रिया पूरी करने वाले गांवों की संख्या में बड़े स्तर पर वृद्धि हुई है।
Bureau
Bureau News Desk
25 Oct 2026
03:43 PM
1 min read
UP में चकबंदी व्यवस्था को मिली रफ्तार, 8 साल में 21 लाख से अधिक वादों का निस्तारण
सोर्स-फाइल फोटो
हाइलाइट्स
चकबंदी न्यायालयों में 21 लाख से अधिक वादों का निस्तारण
प्रदेश के 531 चकबंदी न्यायालयों का कंप्यूटरीकरण
किसानों के भूमि अभिलेख व्यवस्थित करने पर जोर
नवप्रसार के तहत आठ वर्षों में 1,302 गांव चकबंदी प्रक्रिया में शामिल

UP News: उत्तर प्रदेश में चकबंदी व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए पिछले आठ वर्षों में कई स्तरों पर काम किया गया है। चकबंदी निदेशालय के आंकड़ों के अनुसार 2017 की तुलना में 2025 तक चकबंदी प्रक्रिया पूरी करने वाले गांवों की संख्या में वृद्धि हुई है। साथ ही चकबंदी न्यायालयों के कंप्यूटरीकरण और भूमि विवादों से जुड़े वादों के निस्तारण में भी प्रगति दर्ज की गई है। इन प्रयासों का उद्देश्य किसानों की जमीन से संबंधित मामलों का समाधान करना और राजस्व अभिलेखों को व्यवस्थित बनाना है।

चकबंदी निदेशालय के मुताबिक 2017 में प्रदेश के 1,925 गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया पूरी हुई थी। 2025 तक यह संख्या बढ़कर 3,192 गांव हो गई। प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित राजस्व अभिलेख तहसीलों को वापस भेजे गए। इससे भूमि संबंधी दस्तावेजों को व्यवस्थित करने और किसानों के राजस्व कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

चकबंदी व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए न्यायालयों के कंप्यूटरीकरण पर भी जोर दिया गया। 2017 में इस क्षेत्र में कंप्यूटरीकरण की स्थिति शून्य थी, जबकि वर्ष 2025 तक कुल 531 न्यायालयों को कंप्यूटरीकृत किया गया। इनमें उप संचालक चकबंदी, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी और चकबंदी अधिकारी के न्यायालयों के अलावा 180 सहायक चकबंदी अधिकारी न्यायालय भी शामिल हैं।

चकबंदी न्यायालयों में लंबित मामलों के निस्तारण में भी प्रगति दर्ज की गई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार 2017 में 12.55 लाख से अधिक वादों के निस्तारण की स्थिति थी, जबकि वर्ष 2025 तक यह संख्या बढ़कर 21.12 लाख से अधिक हो गई। निदेशालय ने बताया कि पिछले आठ वर्षों में कुल 21 लाख 12 हजार 784 वादों का निस्तारण किया गया। इससे भूमि विवादों के समाधान की प्रक्रिया को गति देने में मदद मिली है।

तकनीक के इस्तेमाल से न्यायालयों के कामकाज को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार पिछले आठ वर्षों में चकबंदी प्रक्रिया के नवप्रसार के तहत 1,302 गांव शामिल किए गए। 2017 में इस श्रेणी में 2,468 गांवों की स्थिति दर्ज थी, जबकि वर्ष 2025 में यह संख्या 1,302 रही।  

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