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अब लखनऊ से कानपुर का सफर मिनटों में, यूपी का पहला बैरियर-फ्री एक्सप्रेसवे शुरू; शहीद पथ पर एलिवेटेड रोड और मेट्रो को भी मिली रफ्तार

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन हो गया है। 4,850 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के साथ शहीद पथ एलिवेटेड रोड और मेट्रो परियोजना पर भी बड़ा अपडेट सामने आया।
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Bureau News Desk
13 Jul 2026
07:19 PM
1 min read
अब लखनऊ से कानपुर का सफर मिनटों में, यूपी का पहला बैरियर-फ्री एक्सप्रेसवे शुरू; शहीद पथ पर एलिवेटेड रोड और मेट्रो को भी मिली रफ्तार
हाइलाइट्स
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन, यात्रा समय कम होने की उम्मीद।
4,850 करोड़ रुपये की तीन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास।
शहीद पथ पर एलिवेटेड रोड और मेट्रो परियोजना की डीपीआर दिसंबर 2026 तक तैयार करने की घोषणा।
हरदोई-लखनऊ सीमा से रिंग रोड तक चार लेन सड़क और इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे पर फ्लाईओवर का शिलान्यास।

लखनऊ, प्रदीप यादव। उत्तर प्रदेश की सड़क संपर्क व्यवस्था को नई गति देते हुए सोमवार को लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे आम लोगों के लिए खोल दिया गया। इसके साथ ही लखनऊ से कानपुर के बीच यात्रा का समय पहले की तुलना में काफी कम होने की उम्मीद है। इसी कार्यक्रम में करीब 4,850 करोड़ रुपये की तीन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया गया।

लखनऊ के सैनिक स्कूल परिसर में आयोजित कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद रहे। इस दौरान एक्सप्रेसवे के अलावा हरदोई-लखनऊ सीमा से लखनऊ रिंग रोड तक चार लेन सड़क और इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे पर नए फ्लाईओवर परियोजना की भी आधारशिला रखी गई।

कार्यक्रम में 23 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया गया। इसके अलावा 541 करोड़ रुपये की लागत से हरदोई-लखनऊ सीमा से लखनऊ रिंग रोड तक चार लेन सड़क निर्माण तथा लखनऊ के इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे पर करीब एक किलोमीटर लंबे चार लेन फ्लाईओवर के निर्माण कार्य का शिलान्यास भी किया गया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य राजधानी और आसपास के जिलों में बढ़ते यातायात दबाव को कम करना तथा क्षेत्रीय संपर्क को बेहतर बनाना है।

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर यात्रा के दौरान उन्नाव से सरोजिनी नगर तक पहुंचने में उन्हें केवल 22 मिनट लगे। उन्होंने कहा कि इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के जरिए लोग लगभग 25 मिनट में कानपुर तक पहुंच सकेंगे। यह उत्तर प्रदेश का पहला बैरियर-फ्री एक्सप्रेसवे है, जहां निर्बाध आवाजाही के लिए आधुनिक यातायात व्यवस्था विकसित की गई है।

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि लखनऊ की प्रमुख यातायात धुरी शहीद पथ के ऊपर प्रस्तावित एलिवेटेड रोड और मेट्रो परियोजना को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से स्वीकृति मिल गई है।

उन्होंने यह भी कहा कि लखनऊ-सीतापुर मार्ग को छह लेन बनाने और किसान पथ के किनारे सर्विस रोड विकसित करने की योजना पर भी काम किया जाएगा। उनके अनुसार, आने वाले समय में लखनऊ के आसपास नए औद्योगिक निवेश से क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।

नितिन गडकरी ने कहा कि शहीद पथ पर बनने वाली एलिवेटेड सड़क और मेट्रो परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) दिसंबर 2026 तक तैयार कर ली जाएगी और उसी अवधि में भूमि पूजन कराने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने बताया कि प्रस्तावित एलिवेटेड सड़क का निर्माण मलेशिया की तकनीक के आधार पर किया जाएगा। यह सिंगल पिलर पर विकसित तीन-स्तरीय संरचना होगी, जिससे भविष्य में यातायात जाम कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित सड़क परियोजनाओं के पूरा होने के बाद लखनऊ से सीतापुर के बीच यात्रा समय में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। उनके अनुसार, वर्तमान में जहां इस मार्ग पर लगभग ढाई घंटे लगते हैं, वहीं भविष्य में यह दूरी करीब 50 मिनट में पूरी की जा सकेगी।

कार्यक्रम के दौरान नितिन गडकरी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में अगले चरण में 50 से 60 हजार करोड़ रुपये की सड़क अवसंरचना परियोजनाओं पर कार्य प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में राज्य सरकार के साथ चर्चा हो चुकी है।

उन्होंने लखनऊ-गोंडा, पड़रौना बाईपास, दादरी-लालकुआं, बाराबंकी-बहराइच, आगरा-ग्वालियर, गाजीपुर-मंझिया, गोरखपुर-शामली और गोरखपुर-सिलीगुड़ी सहित कई राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का भी उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले वर्षों में उत्तर प्रदेश में सड़क, हवाई और मेट्रो संपर्क व्यवस्था में तेजी से विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि लखनऊ-कानपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे राज्य राजधानी क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री ने गंगा एक्सप्रेसवे और जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे जैसी परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि लखनऊ मेट्रो के नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर की आगे की कनेक्टिविटी पर भी कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में राज्य के प्रत्येक पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहर को बाईपास से जोड़ने और प्रत्येक जिले को चार लेन सड़क नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

 

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