लखनऊ, प्रदीप यादव। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन समारोह में रविवार को केवल 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे का लोकार्पण ही नहीं हुआ, बल्कि उत्तर प्रदेश की भविष्य की कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को लेकर भी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं सामने आईं। कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक मंच पर मौजूद रहे। अपने-अपने संबोधन में तीनों नेताओं ने सड़क नेटवर्क, शहरी परिवहन, औद्योगिक विकास और निवेश से जुड़े विभिन्न विषयों पर सरकार की प्राथमिकताओं को सामने रखा।
कार्यक्रम के दौरान लखनऊ की यातायात व्यवस्था, एलिवेटेड कॉरिडोर, संभावित मेट्रो विस्तार, नई सड़क परियोजनाओं और प्रदेश में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से चर्चा में रहे। सरकार की ओर से इस एक्सप्रेसवे को केवल दो शहरों के बीच यात्रा आसान बनाने वाली परियोजना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को गति देने वाले संपर्क मार्ग के रूप में भी प्रस्तुत किया गया।
सरकारी प्रस्तुति के अनुसार, लखनऊ और कानपुर को जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसवे प्रशासनिक और औद्योगिक केंद्रों के बीच तेज संपर्क स्थापित करेगा। इससे परिवहन समय कम होने के साथ लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, औद्योगिक निवेश, सेवा क्षेत्र और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना जताई गई।
सरकार का आकलन है कि एक्सप्रेसवे के आसपास भविष्य में औद्योगिक इकाइयों, लॉजिस्टिक पार्क, होटल, ईंधन केंद्र और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार हो सकता है। इसी कारण इस परियोजना को सामान्य सड़क निर्माण से आगे बढ़कर आर्थिक संपर्क तंत्र के रूप में भी देखा जा रहा है।
समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री एवं लखनऊ सांसद राजनाथ सिंह ने राजधानी में बढ़ते यातायात दबाव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शहर के लगातार विस्तार, एयरपोर्ट के विकास और शहीद पथ पर बढ़ते वाहनों को देखते हुए भविष्य की जरूरतों के अनुरूप नई परिवहन व्यवस्था पर काम किया जाना चाहिए।
उन्होंने एयरपोर्ट से शहीद पथ होते हुए आउटर रिंग रोड तक लगभग 23 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण का सुझाव दिया। साथ ही उन्होंने इस कॉरिडोर के ऊपर मेट्रो संचालन की संभावनाओं पर भी विचार करने की बात कही, ताकि सड़क और सार्वजनिक परिवहन के बीच बेहतर समन्वय विकसित किया जा सके।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के प्रस्ताव के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि एलिवेटेड कॉरिडोर का सुझाव व्यावहारिक है और इस दिशा में आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश देने की बात कही।
उन्होंने कहा कि प्रयास रहेगा कि दिसंबर 2026 से पहले इस परियोजना का भूमि पूजन कराया जा सके। साथ ही यदि तकनीकी रूप से संभव हुआ तो एलिवेटेड कॉरिडोर के साथ मेट्रो संचालन के मॉडल पर भी विचार किया जाएगा। हालांकि परियोजना के क्रियान्वयन को तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के पूरा होने पर निर्भर बताया गया।
अपने संबोधन में नितिन गडकरी ने उत्तर प्रदेश में सड़क संपर्क को और मजबूत बनाने के लिए 50 से 60 हजार करोड़ रुपये की नई परियोजनाओं पर काम किए जाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आने वाले दो वर्षों में प्रदेश में सड़क निर्माण और कनेक्टिविटी से जुड़े कार्यों पर लगभग पांच लाख करोड़ रुपये तक के निवेश का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित योजनाओं में पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए बाईपास, सभी जिला मुख्यालयों को फोरलेन नेटवर्क से जोड़ना, राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार, औद्योगिक क्षेत्रों तक तेज सड़क संपर्क, लॉजिस्टिक्स एवं फ्रेट कॉरिडोर का विकास और प्रमुख धार्मिक व पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी बेहतर बनाने जैसे कार्य शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सड़क अवसंरचना केवल यात्रा को आसान नहीं बनाती, बल्कि उद्योग, निवेश, व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी तैयार करती है।
अपने संबोधन के दौरान नितिन गडकरी ने कहा कि उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कभी ऐसा आश्वासन देने का प्रयास नहीं किया, जिसे पूरा न किया जा सके। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में पहले जिन परियोजनाओं की घोषणा की गई थी, उनमें से अनेक आज धरातल पर दिखाई दे रही हैं। उनके अनुसार विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में आधुनिक सड़क नेटवर्क की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में राज्य में पिछले वर्षों के दौरान सड़क, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और मेट्रो नेटवर्क के विस्तार का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में परिवहन अवसंरचना को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार, नए एयरपोर्ट, मेट्रो परियोजनाओं और सड़क संपर्क में सुधार के प्रयासों का उद्देश्य औद्योगिक निवेश, आर्थिक गतिविधियों और क्षेत्रीय विकास को गति देना है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही विभिन्न अवसंरचना परियोजनाओं का भी उल्लेख किया।
लखनऊ और कानपुर के बीच तैयार एक्सप्रेसवे को केवल यातायात सुविधा तक सीमित नहीं माना जा रहा है। सरकार की ओर से इसे प्रशासनिक और औद्योगिक केंद्रों के बीच तेज संपर्क स्थापित करने वाली परियोजना बताया गया है।
सरकारी आकलन के अनुसार बेहतर सड़क संपर्क से लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, विनिर्माण, सेवा क्षेत्र और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। इसके साथ ही एक्सप्रेसवे के आसपास नए निवेश और औद्योगिक विकास की संभावनाएं भी व्यक्त की गई हैं।
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