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माइक्रो ऑब्जर्वर कौन हैं और कितना होती है इनकी ड्यूटी का वेतन?

Education News: चुनाव में हर वोट की गिनती मायने रखती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर मतदान केंद्र पर एक ऐसा अधिकारी होता है जो पूरी प्रक्रिया पर नजर रखता है? इन्हें ही कहते हैं माइक्रो ऑब्जर्वर, और इनके काम का दायरा और वेतन जानकर आप हैरान रह जाएंगे।
News Desk
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07 Oct 2025
03:23 AM
1 min read
माइक्रो ऑब्जर्वर कौन हैं और कितना होती है इनकी ड्यूटी का वेतन?
हाइलाइट्स
Education News: चुनाव में हर वोट की गिनती मायने रखती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर मतदान केंद्र पर एक ऐसा अधिकारी होता है जो पूरी प्रक्रिया पर नजर रखता है
इन्हें ही कहते हैं माइक्रो ऑब्जर्वर, और इनके काम का दायरा और वेतन जानकर आप हैरान रह जाएंगे।

लोकसभा, विधानसभा या पंचायत चुनाव — हर चुनाव में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए माइक्रो ऑब्जर्वर की अहम भूमिका होती है। ये आमतौर पर केंद्र या राज्य सरकार के अधिकारी होते हैं, जिन्हें चुनाव आयोग विशेष रूप से नियुक्त करता है।

कैसे चुने जाते हैं माइक्रो ऑब्जर्वर?
इस पद के लिए सरकारी कर्मचारी चुने जाते हैं जो ग्रुप-सी या उससे ऊपर के पदों पर कार्यरत हों। इनका काम मतदान केंद्रों की निगरानी करना और यह सुनिश्चित करना होता है कि चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो रहा है।

काम की जिम्मेदारियाँ

माइक्रो ऑब्जर्वर का मुख्य कर्तव्य मतदान प्रक्रिया पर करीबी नजर रखना है। यह सुनिश्चित करते हैं कि:

  • ईवीएम सही तरह से सील की जा रही है।

  • मतदाता की पहचान सही तरीके से हो रही है।

  • मतदाता के हाथ पर चुनावी स्याही सही तरीके से लगाई जा रही है।

मानदेय और भत्ते

माइक्रो ऑब्जर्वर को एक दिन की ड्यूटी का मानदेय ₹2,000 मिलता है। इसके अलावा यात्रा भत्ता (Travel Allowance) और दूर के मतदान केंद्र पर भेजे जाने पर खाने-पीने और रहने का खर्च प्रशासन द्वारा दिया जाता है।
मतदान प्रक्रिया आमतौर पर एक से दो दिन की होती है, और इसके दौरान माइक्रो ऑब्जर्वर हर कदम पर व्यवस्था की निगरानी करते हैं।

 

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