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हैवानियत की हद्द हुई पार, तीसरी बेटी होने पर मां ने नवजात को तंबाकू खिला ली जान

News Desk
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04 Aug 2025
03:50 AM
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हैवानियत की हद्द हुई पार, तीसरी बेटी होने पर मां ने नवजात को तंबाकू खिला ली जान


>उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले से एक ऐसी अमानवीय घटना सामने आई है, जिसने समाज की सोच और मातृत्व की ममता दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक मां ने अपनी 22 दिन की नवजात बेटी को सिर्फ इसलिए मौत के घाट उतार दिया क्योंकि वह तीसरी बार बेटी की मां बनी थी। महिला ने मासूम को तंबाकू का जहरीला पाउडर खिला दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की तफ्तीश शुरू कर दी गई है।


>क्या है पूरा मामला?


>घटना अलीगढ़ जिले के जवां थाना क्षेत्र के गढ़िया भोजपुर गांव की है। यहां के निवासी यवनेश की शादी साल 2019 में नगीना देवी से हुई थी। पहले से ही दो बेटियों (मुदिता और कौशिकी) की मां नगीना ने 8 जुलाई 2025 को तीसरी बेटी यशिका को जन्म दिया। परिजनों के अनुसार, तीसरी बेटी के जन्म के बाद से ही नगीना का व्यवहार बदला-बदला सा था और वह अक्सर अवसादग्रस्त व चुपचाप रहने लगी थी।


>जहर बना मातृत्व


>30 जुलाई को जब घर के अन्य सदस्य बाहर थे, नगीना ने मौका देखकर यशिका को तंबाकू में मिलाया जहरीला पाउडर खिला दिया। दोपहर बाद जब पति यवनेश घर लौटा तो बच्ची की हालत बेहद खराब थी शरीर ठंडा और चेहरा नीला पड़ चुका था। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।


>सच सामने आया


>परिवार ने पहले बच्ची की मौत को सामान्य समझते हुए शव को गांव के कब्रिस्तान में दफना दिया। लेकिन 1 अगस्त को जब यवनेश ने अपनी पत्नी से सीधे सवाल किया, तो नगीना ने कबूल कर लिया कि उसने बेटी को जानबूझकर तंबाकू खिला दी थी, क्योंकि वह तीसरी बार बेटी नहीं चाहती थी।


>कब्र से निकलवाया जाएगा शव


>यवनेश की लिखित शिकायत पर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी महिला नगीना देवी को IPC की धारा 302 (हत्या) और अन्य धाराओं में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। सीओ तृतीय सर्वम सिंह के अनुसार, मृत बच्ची का शव कब्र से निकालने की कानूनी प्रक्रिया चल रही है ताकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के असली कारण की पुष्टि की जा सके।


>समाज के लिए सवाल


>यह घटना न सिर्फ कानून की दृष्टि से गंभीर अपराध है, बल्कि यह समाज की उस पुरानी सोच को भी उजागर करती है जिसमें बेटियों को बोझ समझा जाता है। सवाल यह भी है कि जब एक मां, जो जीवन देने वाली होती है, खुद मृत्यु का कारण बन जाए, तो दोष केवल कानून का है या हमारी मानसिकता का?

 

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