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अयोध्या के हनुमानगढ़ी महंत राजू दास ने मौलाना तौकीर रजा को दी चेतावनी

UP News: हरदोई में बोले राजू दास — हिंसा भड़काने के आरोपों को गंभीरता से लें, पर कार्रवाई कानून के दायरे में होनी चाहिए; साम्प्रदायिक तनाव से बचने की अपील भी जरूरी
News Desk
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01 Oct 2025
04:45 AM
1 min read
अयोध्या के हनुमानगढ़ी महंत राजू दास ने मौलाना तौकीर रजा को दी चेतावनी
हाइलाइट्स
UP News: हरदोई में बोले राजू दास — हिंसा भड़काने के आरोपों को गंभीरता से लें, पर कार्रवाई कानून के दायरे में होनी चाहिए; साम्प्रदायिक तनाव से बचने की अपील भी जरूरी


>हरदोई, 30 सितंबर - अयोध्या स्थित हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने बरेली में हुई हिंसा को लेकर तीखा रुख अपनाया और संबंधित पक्षों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। हालांकि महंत ने घटना को गंभीर बताया और आरोपियों के प्रति सख्त कदम उठाने की वकालत की, पर उनके शब्दों को रिपोर्ट करते समय यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि किसी भी प्रकार की कार्रवाई दंडात्मक प्रक्रिया और कानून के दायरे में ही होनी चाहिए।


>राजू दास ने आरोप लगाया कि मौलाना मोहम्मद तौकीर रजा ने कुछ मुस्लिम युवकों को उकसाकर घटनास्थल पर शोर-शराबा बढ़ाया और स्वयं सुरक्षित ठिकाने से प्रेरित कर रहे थे। महंत ने कहा कि ऐसे प्रयासों की जाँच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ तेज़, निष्पक्ष तथा पारदर्शी कानूनी कार्रवाई हो। उन्होंने सरकार से यह अपेक्षा जताई कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने में कोई ढिलाई नहीं बरती जाए।


>महंत राजू दास की टिप्पणी में यह भी उभर कर आया कि धर्म या आस्था के नाम पर सड़कों पर उपद्रव, दूकानें लूटना या पुलिस की वर्दी भंग करना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार, प्रशिक्षण और सकारात्मक विकल्प देने की आवश्यकता है ताकि असमंजस और हिंसा की ओर धकेले न जाएं।


>इस बीच, राजू दास ने स्थानीय प्रशासन और सरकार से अपील की कि मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर त्वरित जांच करायी जाए और दोषियों के खिलाफ मानक प्रक्रियाओं के अनुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने सामुदायिक नेताओं से शांति बनाए रखने तथा अफवाहों पर रोक लगाने का आग्रह किया।


>साम्प्रदायिक घटनाओं की रिपोर्टिंग और उन पर प्रतिक्रिया देते समय मीडिया तथा नागरिकों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है — त्वरित नाराजगी या अनुशंसित कठोर कार्यवाही की मांगें सामाजिक तनाव को और बढ़ा सकती हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच हो, दोष सिद्ध होने पर कानून के अनुसार कदम उठाए जाएं, और सामाजिक समरसता बहाल रखने के उपाय प्राथमिकता में हों।

 

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