UP News: प्रदेश के पीलीभीत जनपद में मतदाता सूची में गड़बड़ी करने के मामले में हटाए गए दोनों उपजिलाधिकारियों को लेकर शासन ने फिर बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। शासन ने हेमंत कुमार चौधरी और मयंक गोस्वामी की लखनऊ में प्रस्तावित तैनाती के आदेश को निरस्त कर दिया है। दोनों अफसरों को फिलहाल प्रतीक्षारत कर दिया गया है। इस निर्णय के बाद राज्य के प्रशासनिक महकमे में मामला फिर चर्चा में आ गया है।
उल्लेखनीय है कि शासन ने पीलीभीत जनपद में तैनाती के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद दोनों उपजिलाधिकारियों को पद से हटा दिया था। पद से हटाये जाने के बाद दोनों अफसरों को लखनऊ में अलग-अलग विभागों में नवीन तैनाती दी गयी थी। अब शासन ने पुराने आदेशों को निरस्त करते हुए दोनों अधिकारियों को प्रतीक्षा सूची में डाल दिया है। हेमंत कुमार चौधरी पीलीभीत में उपजिलाधिकारी के पद पर तैनात थे।
उपजिलाधिकारी पद से हटाए जाने के बाद श्री चौधरी को उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) के पद पर तैनाती दी गयी थी। लेकिन अब शासन ने इस नियुक्ति को निरस्त करते हुए श्री चौधरी को प्रतीक्षारत कर दिया है। वहीं मयंक गोस्वामी भी पीलीभीत में एसडीएम के पद पर तैनात थे। उन्हें भी मतदाता सूची में गड़बड़ी करने पर पद से हटाये जाने के बाद लखनऊ स्थित चकबंदी मुख्यालय में बंदोबस्त अधिकारी (चकबंदी) बनाया गया था।
शासन ने अब श्री गोस्वामी की नियुक्ति आदेश को भी रद्द कर दिया है। मयंक गोस्वामी को प्रतीक्षारत कर दिया गया है। शासन के नए आदेश के बाद दोनों अधिकारी फिलहाल किसी विभाग में कोई नवीन जिम्मेदारी नहीं संभालेंगे। अगले आदेश तक दोनों अधिकारी प्रतीक्षारत रहेंगे। पीलीभीत जनपद में मतदाता सूची में गड़बड़ी से शुरू हुआ मामला अब तैनाती आदेश निरस्त होने के बाद फिर सुर्खियों में आ गया है।
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