सरकारी स्तर पर "ग्रीन मंडी, क्लीन मंडी" का दावा करने वाली अकबरपुर नवीन मंडी की जमीनी तस्वीर इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रही है। हल्की बारिश के बाद मंडी परिसर में जगह-जगह सड़े हुए फल, सब्जियां और कूड़े के ढेर दिखाई दिए, जिससे पूरे परिसर में दुर्गंध फैल गई। व्यापारियों, किसानों और खरीदारी के लिए आने वाले लोगों का कहना है कि हालात ऐसे हैं कि मंडी में पैदल चलना और कुछ देर रुकना भी मुश्किल हो गया है।

बारिश के बाद मंडी परिसर का बड़ा हिस्सा गंदगी से भर गया। कई स्थानों पर सड़ चुके फल और सब्जियां खुले में पड़ी रहीं, जिनसे उठ रही तेज दुर्गंध ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी। मंडी आने वाले लोगों का कहना है कि नियमित सफाई नहीं होने के कारण हर बारिश के बाद स्थिति और खराब हो जाती है।

व्यापारियों का आरोप है कि मंडी प्रशासन की सफाई व्यवस्था केवल प्रशासनिक कार्यालय तक ही सीमित दिखाई देती है। कार्यालय के आसपास सफाई नजर आती है, लेकिन मंडी के अन्य हिस्सों में कूड़े और सड़ी हुई सब्जियों के ढेर लंबे समय तक पड़े रहते हैं। इससे व्यापारियों के साथ-साथ किसानों और ग्राहकों को भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि मंडी प्रशासन सफाई व्यवस्था को लेकर गंभीर नहीं है। उनका आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी मंडी की वास्तविक स्थिति का नियमित निरीक्षण नहीं करते, जिसके कारण कचरा निस्तारण और सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि यदि समय पर कचरा हटाया जाए तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता है।
व्यापारियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि खुले में पड़े सड़े फल और सब्जियां केवल दुर्गंध ही नहीं फैला रहे, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी चिंता का विषय बन सकते हैं। लगातार गंदगी रहने से संक्रमण फैलने की आशंका भी बनी रहती है, इसलिए समय रहते प्रभावी सफाई व्यवस्था जरूरी है।
व्यापारियों और आम लोगों ने मंडी प्रशासन से पूरे परिसर में विशेष सफाई अभियान चलाने, सड़े हुए फल-सब्जियों को तुरंत हटाने, नियमित कचरा निस्तारण सुनिश्चित करने और "ग्रीन मंडी, क्लीन मंडी" के दावों को जमीनी स्तर पर लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो मंडी की व्यवस्था और व्यापार दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
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