UP News: अस्पतालों में संक्रमण को फैलने से रोकना हो या नदियों के पानी को साफ करना, खेती को नुकसान से बचाना हो या फिर गंदे पानी का बेहतर तरीके से उपचार करना, इन सभी कामों में अब विज्ञान की एक नई तकनीक मददगार बन सकती है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इसी दिशा में माइक्रोबायोम टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए एक ड्राफ्ट तैयार किया है। इसके जरिए सूक्ष्मजीवों की मदद से स्वास्थ्य, पर्यावरण और खेती से जुड़ी समस्याओं का समाधान तलाशने की योजना है।
सरकार की इस पहल का मकसद ऐसी तकनीक को बढ़ावा देना है, जिसका फायदा आम लोगों की जिंदगी में दिखाई दे। साफ पानी, सुरक्षित भोजन, अस्पतालों में संक्रमण पर नियंत्रण और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने जैसे मुद्दों पर इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। फिलहाल इसकी शुरुआत प्रदेश के कुछ चुनिंदा संस्थानों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में करने का प्रस्ताव है। प्रयोग सफल रहने पर इसे दूसरे क्षेत्रों में भी लागू करने की योजना है।
अस्पतालों में कई बार मरीज इलाज के दौरान भी संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं। कुछ संक्रमण ऐसे होते हैं, जिन पर सामान्य दवाओं का असर कम होने लगता है। इसे एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस कहा जाता है। ऐसी स्थिति में मरीज का इलाज मुश्किल हो सकता है और उसे ठीक होने में ज्यादा समय लग सकता है। ड्राफ्ट में सरकारी और चुने हुए निजी अस्पतालों को जोड़कर संक्रमण की निगरानी करने का सुझाव दिया गया है। इसके लिए सामान्य लैब जांच के साथ जरूरत पड़ने पर डीएनए जांच और सीक्वेंसिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे संक्रमण फैलाने वाले सूक्ष्मजीवों और दवाओं के प्रति उनकी प्रतिरोधक क्षमता को समझने में मदद मिलेगी।
माइक्रोबायोम तकनीक का इस्तेमाल केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं रहेगा। ड्राफ्ट में गंगा, यमुना और गोमती नदी के जलग्रहण क्षेत्रों में भी पायलट परियोजनाएं शुरू करने का सुझाव दिया गया है। इसमें गंदे पानी को साफ करने वाले संयंत्रों में मौजूद छोटे जीव की भूमिका का अध्ययन किया जाएगा। ये छोटे जीव गंदे पानी में मौजूद कुछ प्रदूषकों को तोड़ने में मदद करते हैं। उनकी कार्यक्षमता को बेहतर बनाने के लिए पानी में हवा की पर्याप्त उपलब्धता, पोषक तत्वों का संतुलन और जहरीले पदार्थों की मौजूदगी जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा। इससे जल शोधन की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के तरीके खोजे जा सकेंगे। हालांकि, नदियों के प्रदूषण में कमी का वास्तविक असर परियोजनाओं के परिणामों पर निर्भर करेगा।
खेती में भी छोटे-छोटे जीव बड़ी भूमिका निभाते हैं। मिट्टी में मौजूद कई सूक्ष्मजीव उसकी उर्वरता बनाए रखने और पौधों के विकास में मदद करते हैं। वहीं कुछ सूक्ष्मजीव फसलों में बीमारियां भी पैदा कर सकते हैं। ड्राफ्ट में कृषि से जुड़ी परियोजनाओं के जरिए यह पता लगाने पर जोर दिया गया है कि माइक्रोबायोम तकनीक की मदद से फसलों को नुकसान से बचाने और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने के क्या तरीके अपनाए जा सकते हैं। इसके अलावा खाद्य सुरक्षा और कृषि उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी।
उत्तर प्रदेश प्रमोट फार्मा काउंसिल की सीईओ कृतिका शर्मा के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों और विज्ञान एवं तकनीक के जरिए नवाचार को बढ़ावा देने की सोच के अनुरूप यह ड्राफ्ट तैयार किया गया है। इसे जल्द ही मुख्यमंत्री के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू करने की दिशा में काम शुरू होगा। योजना के तहत, पहले तीन महीनों में प्रयोगशालाओं की क्षमता का आकलन किया जाएगा। संबंधित विभागों से बातचीत कर पायलट प्रोजेक्ट के लिए उपयुक्त स्थान भी चुने जाएंगे। चौथे से बारहवें महीने के बीच अस्पतालों में संक्रमण की निगरानी, गंदे पानी की जांच और कृषि से जुड़ी परियोजनाओं पर काम करने का प्रस्ताव है।
इसके बाद तेरहवें से चौबीसवें महीने तक अलग-अलग मौसमों और फसल चक्रों के दौरान मिले नतीजों का आकलन किया जाएगा। जिन प्रयोगों के परिणाम अच्छे होंगे, उन्हें आगे बढ़ाने पर विचार किया जाएगा। इस काम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, कृषि, उद्यान, नगर विकास, जल एवं स्वच्छता और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विभागों का सहयोग लिया जाएगा। लखनऊ स्थित बायोटेक पार्क और उत्तर प्रदेश प्रमोट फार्मा काउंसिल की भी अहम भूमिका होगी।
आखिर क्या है माइक्रोबायोम तकनीक?
माइक्रोबायोम का मतलब ऐसे छोटे जीवो के समुदाय से है, जिनमें बैक्टीरिया और फंगस जैसे जीव शामिल होते हैं। ये हमारे शरीर, मिट्टी, पानी, फसलों और आसपास के वातावरण में पाए जाते हैं। इनमें से कुछ जीव बीमारियां फैलाते हैं, जबकि कई हमारे लिए फायदेमंद होते हैं। उदाहरण के तौर पर, कुछ सूक्ष्मजीव पाचन में मदद करते हैं, कुछ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखते हैं और कुछ जैविक कचरे को तोड़कर उसके विघटन में योगदान देते हैं।
इन्हीं सूक्ष्मजीवों को समझकर और उनकी उपयोगी गतिविधियों का सही इस्तेमाल करके स्वास्थ्य, खेती और पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं के समाधान खोजने की कोशिश माइक्रोबायोम तकनीक का अहम हिस्सा है। अब असली चुनौती इस योजना को जमीन पर उतारने की होगी। अगर शुरुआती परियोजनाओं से अच्छे नतीजे मिलते हैं, तो यह तकनीक अस्पतालों में संक्रमण की बेहतर निगरानी, गंदे पानी के उपचार और खेती से जुड़ी समस्याओं के समाधान में मददगार साबित हो सकती है। इससे आम लोगों को साफ पानी, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और टिकाऊ खेती के रूप में लाभ मिलने की उम्मीद है।
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